Uttarakhand: राम शरण नौटियाल ने छोड़ी भाजपा कांग्रेस में हुए शामिल – The Hill News

Uttarakhand: राम शरण नौटियाल ने छोड़ी भाजपा कांग्रेस में हुए शामिल

देहरादून। देहरादून जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष और बॉलीवुड गायक जुबिन नौटियाल के पिता राम शरण नौटियाल ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। सोमवार को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। उनके कांग्रेस में शामिल होने के मौके पर उत्तराखंड कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

कांग्रेस में शामिल होने के दौरान प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य समेत अन्य नेता उपस्थित रहे। राम शरण नौटियाल के पार्टी में आने को उत्तराखंड की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

राम शरण नौटियाल लंबे समय तक भाजपा से जुड़े रहे हैं। हालांकि, कुछ दिन पहले उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस फैसले के बाद से ही उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाएं चल रही थीं। अब कांग्रेस की सदस्यता लेने के साथ उन्होंने अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत कर दी है।

सम्मान नहीं मिलने से थे नाराज

भाजपा छोड़ने के पीछे राम शरण नौटियाल ने पार्टी में सम्मान नहीं मिलने को प्रमुख वजह बताया था। उनका कहना था कि पार्टी में उन्हें वह सम्मान नहीं मिल रहा था, जिसकी वह अपेक्षा रखते थे। इसी असंतोष के चलते उन्होंने भाजपा से अलग होने का निर्णय लिया।

उनके कांग्रेस में शामिल होने से उत्तराखंड में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। खासकर देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में उनके राजनीतिक संपर्कों तथा पूर्व में जिला पंचायत अध्यक्ष के रूप में निभाई गई भूमिका के कारण इस घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है।

कांग्रेस को मिल सकता है राजनीतिक लाभ

उत्तराखंड में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा लंबे समय से जारी है। ऐसे में भाजपा के पुराने नेता का कांग्रेस में शामिल होना दोनों दलों के लिए राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। कांग्रेस इसे अपने संगठन को मजबूत करने के अवसर के रूप में देख सकती है, जबकि भाजपा के लिए यह अपने पूर्व नेताओं के असंतोष के कारणों पर विचार करने का विषय हो सकता है।

हालांकि, राम शरण नौटियाल के कांग्रेस में शामिल होने का आगामी चुनावों और स्थानीय राजनीति पर कितना प्रभाव पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल उनके इस फैसले ने उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू कर दी है।

 

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