चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और ट्रांसफर-पोस्टिंग मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के सामने पेश हुए। वह दोपहर करीब तीन बजे चंडीगढ़ के सेक्टर-30 स्थित सीबीआई कार्यालय पहुंचे और रात लगभग साढ़े आठ बजे वहां से बाहर निकले। जांच एजेंसी ने उनसे करीब साढ़े पांच घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान लगभग 40 सवाल पूछे जाने की जानकारी सामने आई है। घुम्मन को सोमवार दोपहर दो बजे फिर से जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया है।
राजबीर सिंह घुम्मन के साथ अधिवक्ता जीपीएस घुम्मन भी सीबीआई कार्यालय पहुंचे थे। उनके वकील के अनुसार, घुम्मन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप जांच में सहयोग करने के लिए पेश हुए। मामले में जांच एजेंसी की कार्रवाई ऐसे समय में हो रही है, जब पंजाब सरकार और सीबीआई के बीच जांच को लेकर कानूनी प्रक्रिया भी जारी है।
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश के बाद जांच तेज
12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की प्राथमिकी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हालांकि, अदालत ने उस चरण में आरोपितों के खिलाफ गिरफ्तारी सहित कठोर कार्रवाई नहीं करने का अंतरिम निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली पंजाब सरकार की याचिका पर नोटिस जारी किया था, जिसमें सीबीआई को मामले की जांच करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने राज्य सरकार को जांच में सहयोग करने के लिए भी कहा था।
इससे पहले हाईकोर्ट ने पांच अक्टूबर को सीबीआई को मामला दर्ज कर जांच करने और दो महीने के भीतर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। पंजाब सरकार ने छह अक्टूबर को इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जुलाई और अगस्त 2026 में पंजाब के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी।
छह लोगों के नाम एफआईआर में शामिल
सीबीआई की 251 पन्नों की एफआईआर में छह लोगों को नामजद किया गया है। इनमें राजबीर सिंह घुम्मन, नितिन गोहल, जितिन गोहल उर्फ राजा, रोमी राजा महाजन, बीर देविंदर और चावल मिल कारोबारी राजदीप सिंह नागरा के नाम शामिल हैं। हालांकि, एफआईआर में नाम होने का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है। मामले में आरोपों की जांच जारी है।
पोस्टिंग, टेंडर और जमीन से जुड़े मामलों की पड़ताल
एफआईआर के अनुसार, जांच का दायरा वर्ष 2023 से 2026 के बीच की कथित गतिविधियों तक फैला हुआ है। इसमें आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की पोस्टिंग, विभागीय कार्रवाई, नीतिगत फैसले, सरकारी टेंडर, लाइसेंस, जमीन के इस्तेमाल में बदलाव यानी चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू), संपत्ति विवाद और राजस्व मामलों में कथित लेन-देन की पड़ताल शामिल है।
ईडी ने आरोप लगाया है कि नितिन गोहल सरकारी काम कराने के इच्छुक लोगों और राजबीर घुम्मन के बीच कथित बिचौलिये की भूमिका निभा रहा था। एजेंसी ने इस सिलसिले में व्हाट्सऐप चैट और अन्य डिजिटल सामग्री मिलने का दावा किया है। गमाडा की जमीन तथा रियल एस्टेट से जुड़े कथित मामलों में कुछ ठिकानों से दस्तावेज और डिजिटल सामग्री मिलने की बात भी सामने आई है।
ईडी के दावे के मुताबिक, नितिन गोहल से 20.98 लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे। जांच एजेंसियां इन तथ्यों और कथित लेन-देन के संबंधों की पड़ताल कर रही हैं। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
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