Uttarakhand: चलती बस में छात्रा से छेड़खानी के दोषी को तीन साल की सजा – The Hill News

Uttarakhand: चलती बस में छात्रा से छेड़खानी के दोषी को तीन साल की सजा

नैनीताल। चलती बस में छात्रा से छेड़खानी और अभद्र व्यवहार के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि शंकर मिश्रा की अदालत ने एक आरोपित को दोषी करार देते हुए तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर अलग-अलग धाराओं में कुल 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। वहीं, घटना से संबंधित वीडियो बनाने और प्रसारित करने के आरोप में दो अन्य आरोपितों को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर दोषमुक्त कर दिया गया।

सहायक लोक अभियोजक अंजनि कुमार तिवारी के अनुसार मामला चार जून 2022 का है। बिंदुखत्ता क्षेत्र की रहने वाली और हल्द्वानी के एक संस्थान में पढ़ने वाली छात्रा सेंचुरी बस से घर लौट रही थी। मोटाहल्दू और गुमटी हल्दूचौड़ के बीच बस में आरोपित शुभम सक्सेना ने उसके साथ जबरन अभद्र व्यवहार और छेड़खानी की। इस दौरान छात्रा को चोट भी लगी।

घटना के बाद छात्रा काफी घबरा गई। बाद में जब उसने बस में मौजूद बच्चों के मोबाइल फोन में घटना से संबंधित वीडियो देखा तो उसने लालकुआं कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

वीडियो प्रसारित करने का भी लगा था आरोप

जांच के दौरान पुलिस ने छेड़खानी के मामले में शुभम सक्सेना के खिलाफ संबंधित धाराओं में आरोप पत्र तैयार किया। वहीं, वीडियो बनाने और उसे प्रसारित करने के आरोप में अभिषेक कुमार उर्फ अर्जुन और शहजाद अंसारी के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत भी कार्रवाई की गई।

जांच पूरी होने के बाद तीनों आरोपितों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया। अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए पीड़िता समेत नौ गवाहों के बयान दर्ज कराए। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और अन्य दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए।

आरोपितों ने खुद को निर्दोष बताते हुए आरोपों से इनकार किया। अभिषेक ने कहा कि उसने घटना का कोई वीडियो नहीं बनाया। बचाव पक्ष की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि मामले में लगाए गए आरोप सही नहीं हैं।

वीडियो प्रसारित करने का आरोप साबित नहीं हुआ

अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों, गवाहों के बयानों तथा उपलब्ध दस्तावेजों का मूल्यांकन किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अभिषेक और शहजाद के खिलाफ ऐसा पर्याप्त साक्ष्य सामने नहीं आया, जिससे यह साबित हो सके कि दोनों ने वीडियो बनाकर उसे प्रसारित किया था।

सीएफएसएल चंडीगढ़ में पेनड्राइव की जांच के दौरान भी ऐसा प्रमाण नहीं मिला, जिससे आरोपितों द्वारा आपत्तिजनक वीडियो प्रसारित किए जाने की पुष्टि होती। इसी आधार पर अदालत ने दोनों को आइटी एक्ट के आरोप से दोषमुक्त कर दिया।

शुभम को अलग-अलग धाराओं में सजा

अदालत ने शुभम को धारा 354 के तहत तीन साल का कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माना, धारा 354ए के तहत दो साल का कारावास और दो हजार रुपये अर्थदंड, धारा 354डी के तहत दो साल का कारावास और दो हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 323 के तहत एक साल के कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।

अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। दोषी की ओर से उसे पहला अपराध बताते हुए राहत देने का अनुरोध किया गया था, लेकिन अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध होने के बाद निर्धारित सजा सुनाई।

 

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