देहरादून। मानसून के दौरान भारी बारिश और भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की मरम्मत के लिए उत्तराखंड के सभी जिलों में अभियान तेज कर दिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश की सड़कों को 15 अक्टूबर तक गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके बाद मुख्यमंत्री स्वयं विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर सड़कों की स्थिति और मरम्मत कार्यों की प्रगति का जायजा लेंगे। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद संबंधित विभागों की टीमें पहाड़ से मैदान तक फील्ड में उतरकर काम में जुटी हैं।
मानसून के दौरान लगातार हुई बारिश और कई स्थानों पर भूस्खलन के कारण प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में सड़कें प्रभावित हुई हैं। कई मार्गों पर गड्ढे बनने के साथ सड़क के हिस्सों को भी नुकसान पहुंचा है। इससे स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों और अन्य यात्रियों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश का दौर कम होने के बाद सरकार ने सड़क मरम्मत को प्राथमिकता देते हुए विभागीय अधिकारियों को तेजी से कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश के सभी जिलों में क्षतिग्रस्त सड़कों और संपर्क मार्गों को चिन्हित किया जा रहा है। इसके बाद क्षति की गंभीरता के आधार पर मरम्मत कार्य को प्राथमिकता दी जा रही है। जहां सामान्य पैचवर्क से सड़क को ठीक किया जा सकता है, वहां तत्काल मरम्मत कराई जा रही है। अधिक क्षतिग्रस्त हिस्सों में जरूरत के अनुसार पुनर्निर्माण और अन्य तकनीकी कार्य किए जा रहे हैं।
पर्वतीय क्षेत्रों में मुख्य मार्गों के साथ ग्रामीण और संपर्क सड़कों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पहाड़ी इलाकों में सड़कें केवल आवागमन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि गांवों को स्वास्थ्य केंद्रों, शिक्षण संस्थानों, बाजारों और अन्य आवश्यक सुविधाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में इन मार्गों की जल्द मरम्मत को आवश्यक सेवाओं की सुचारु उपलब्धता से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
मैदानी जिलों में भी बारिश और जलभराव से प्रभावित सड़कों को दुरुस्त करने का काम जारी है। विभागीय टीमें मौके पर पहुंचकर क्षति का आकलन कर रही हैं और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार मरम्मत कार्य करा रही हैं। अधिकारियों को कार्यों की नियमित समीक्षा करने और प्रतिदिन प्रगति पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया है कि 15 अक्टूबर की समयसीमा केवल औपचारिक लक्ष्य नहीं है। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद वह स्वयं सड़कों की स्थिति का निरीक्षण करेंगे। ऐसे में विभागों के सामने निर्धारित समय में काम पूरा करने के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता बनाए रखने की जिम्मेदारी भी है। सरकार का जोर केवल गड्ढे भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसी मरम्मत पर है जो टिकाऊ हो और लोगों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन उपलब्ध करा सके।
सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों में गुणवत्ता को लेकर भी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। निर्धारित मानकों की अनदेखी, घटिया कार्य या अनावश्यक देरी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का उद्देश्य मानसून के बाद प्रदेश के सड़क नेटवर्क को जल्द से जल्द सामान्य स्थिति में लाना है।
अभियान के तहत आने वाले दिनों में मरम्मत कार्यों की गति और बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि निर्धारित समयसीमा तक अधिक से अधिक क्षतिग्रस्त सड़कों को दुरुस्त किया जा सके। इससे प्रदेशवासियों को बेहतर, सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।