- जफर की गिरफ्तारी के बाद अब एटीएस खंगालेगी मदरसों का रिकॉर्ड
मेरठ। उत्तर प्रदेश की आतंकवाद निरोधक इकाई (एटीएस) ने मेरठ में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए जैश-ए-मोहम्मद के एक संदिग्ध आतंकी को गिरफ्तार कर देश विरोधी साजिशों का भंडाफोड़ किया है। गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद जफर मूल रूप से बिहार के पूर्णिया जिले का रहने वाला है, जिसे मेरठ के कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित एक मस्जिद से पकड़ा गया। जांच में सामने आया है कि जफर को पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने विशेष रूप से पाकिस्तानी आतंकियों को भारत में शरण दिलाने और उनका नेटवर्क तैयार करने के लिए प्रशिक्षित किया था।
एटीएस की शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जफर न केवल आतंकियों को पनाह देने की योजना बना रहा था, बल्कि वह स्वयं भी पाकिस्तान जाने की तैयारी में था। जैश के आका उसे सीमा पार बुलाकर हथियारों और आतंकी गतिविधियों की विशेष ट्रेनिंग देना चाहते थे। जफर के पास से बरामद साहित्य और दस्तावेजों से पता चला है कि वह जैश के सरगना मसूद अजहर की विचारधारा से बुरी तरह प्रभावित था। उसके पास मिली एक किताब में मसूद अजहर के तिहाड़ जेल में रहने और 1999 के कंधार विमान अपहरण कांड के दौरान उसकी रिहाई के किस्सों का विस्तार से वर्णन है, जिन्हें पढ़कर जफर मुजाहिद बनने और ‘जिहाद’ फैलाने के लिए प्रेरित हुआ था।
मस्जिद के चंदे से आतंकी फंडिंग का खेल
मोहम्मद जफर की गतिविधियां केवल कट्टरपंथी विचारधारा तक सीमित नहीं थीं, बल्कि वह आतंकी फंडिंग में भी सक्रिय रूप से जुटा था। वह मस्जिद के नाम पर आम लोगों से चंदा इकट्ठा करता था और उस पैसे को जैश-ए-मोहम्मद के नेटवर्क तक पहुंचाता था। उसका मुख्य उद्देश्य इस धन का उपयोग भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए करना था। जफर की हिस्ट्री खंगालने पर पता चला कि वह पहली बार 2017 में पढ़ाई के सिलसिले में मेरठ आया था, लेकिन एक मदरसे में पढ़ते हुए वह फेल हो गया और वापस बिहार लौट गया। इसके बाद 2022 में वह दोबारा मेरठ आया और हापुड़ की शेरपुर स्थित एक मस्जिद का इमाम बन गया, जहां से उसने जैश के साथ अपने संबंधों को और मजबूत किया।
सोशल मीडिया पर तैयार किया था युवाओं का नेटवर्क
एटीएस ने जफर के पास से बरामद मोबाइल फोन, फेसबुक और व्हाट्सएप अकाउंट का पूरा रिकॉर्ड खंगाल लिया है। जांच में पता चला है कि उसने मेरठ, हापुड़, सहारनपुर और बुलंदशहर के स्थानीय युवाओं को जोड़कर एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था। इस ग्रुप के जरिए वह युवाओं को कट्टरपंथी बनाने की कोशिश कर रहा था। एटीएस अब इस ग्रुप से जुड़े हर एक सदस्य की पहचान करने में जुटी है।
| जांच के मुख्य बिंदु और आगामी कार्रवाई | विवरण |
| डिजिटल साक्ष्य | फेसबुक और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए आतंकी नेटवर्क का विस्तार। |
| निशाने पर अन्य जनपद | मेरठ, हापुड़, सहारनपुर और बुलंदशहर के संदिग्ध युवकों की तलाश। |
| मदरसा जांच | मेरठ के अन्य मदरसों में पढ़ रहे संदिग्ध छात्रों की प्रोफाइलिंग। |
| निगरानी | बुलंदशहर में रह रहे जफर के बहनोई की गतिविधियों पर एटीएस की नजर। |
मदरसों के सत्यापन की उठी मांग
जफर की गिरफ्तारी के बाद स्थानीय स्तर पर भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सिरोही ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने मांग की है कि यदि आतंकी गतिविधियों में मदरसा दारुल उलूम या किसी अन्य संस्थान की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उनके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाए। साथ ही, उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि मदरसों में बाहर से आकर पढ़ने वाले सभी विद्यार्थियों का अनिवार्य रूप से पुलिस सत्यापन कराया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर लगाम लगाई जा सके। एटीएस अब जफर से मिले इनपुट के आधार पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में भी छापेमारी की तैयारी कर रही है।
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