नई दिल्ली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के निदेशक वी. कामाकोटी के विरुद्ध की गई एक टिप्पणी ने देश के शैक्षणिक गलियारों में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। प्रियंका गांधी ने कामाकोटी को ‘गोमूत्र एक्सपर्ट’ कहकर संबोधित किया था, जिसके बाद देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के वैज्ञानिक और प्रोफेसर उनके विरोध में एकजुट हो गए हैं। इस बयान को विशेषज्ञों ने न केवल एक व्यक्ति विशेष का अपमान माना है, बल्कि इसे देश के सर्वोच्च शैक्षणिक संस्थानों की गरिमा पर प्रहार करार दिया है।
200 से अधिक शिक्षाविदों ने लिखा खुला पत्र
प्रियंका गांधी के इस बयान पर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए देशभर के 200 से अधिक जाने-माने शिक्षाविदों ने एक ‘ओपन लेटर’ (खुला पत्र) जारी किया है। इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, वरिष्ठ शोधकर्ता और प्रोफेसर शामिल हैं। इन विद्वानों का कहना है कि राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन किसी वैज्ञानिक या प्रतिष्ठित संस्थान के प्रमुख की योग्यता को इस तरह अपमानजनक शब्दों से तौलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। शिक्षाविदों ने मांग की है कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय नेताओं को अपनी भाषा और मर्यादा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
संस्थानों की साख पर चोट का आरोप
खुले पत्र के माध्यम से विद्वानों ने तर्क दिया है कि आईआईटी मद्रास जैसे संस्थान वैश्विक स्तर पर भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। वी. कामाकोटी जैसे विशेषज्ञ अपनी वर्षों की मेहनत और प्रतिभा के बल पर इन पदों तक पहुँचते हैं। उन्हें किसी राजनीतिक विचारधारा या अपमानजनक उपमाओं के साथ जोड़ना विज्ञान और शोध के प्रति अनादर प्रदर्शित करता है। शिक्षाविदों का मानना है कि इस तरह की टिप्पणियों से युवा शोधकर्ताओं और छात्रों के मनोबल पर बुरा असर पड़ता है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय संस्थानों की साख कमजोर होती है।
राजनीतिक खींचतान में विशेषज्ञ बने निशाना
यह विवाद उस समय गहराया है जब देश में शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर पहले से ही भारी राजनीतिक तनाव बना हुआ है। विपक्षी दल लगातार सरकार और संबंधित विभागों के अधिकारियों पर हमलावर हैं। हालांकि, शिक्षा जगत का कहना है कि राजनीतिक विरोध के चक्कर में विशेषज्ञों को निशाना बनाना गलत है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि शैक्षणिक नेतृत्व को राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए ताकि वे बिना किसी दबाव के देश के भविष्य का निर्माण कर सकें।
माफी और बयान वापस लेने की मांग
शिक्षाविदों ने अपने पत्र के अंत में प्रियंका गांधी से इस टिप्पणी को वापस लेने और अपनी भाषा में सुधार करने की अपेक्षा की है। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्रीय नेता से यह उम्मीद की जाती है कि वह वैज्ञानिकों और गुरुओं का सम्मान करें, न कि उनके विरुद्ध ऐसी शब्दावली का प्रयोग करें जो समाज में गलत संदेश भेजे। वर्तमान में यह मामला सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है, जहाँ लोग बौद्धिक विमर्श और राजनीतिक बयानबाजी की सीमाओं को लेकर अपनी राय साझा कर रहे हैं। फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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