नई दिल्ली। अगले महीने नीदरलैंड और बेल्जियम में आयोजित होने वाले एफआईएच (FIH) वर्ल्ड कप के लिए भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों की नई जर्सी के रंग को लेकर देश में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय टीमें अपनी वर्षों पुरानी पारंपरिक नीली किट को छोड़कर अब ‘केसरिया’ रंग की जर्सी में खेलते हुए नजर आएंगी। हॉकी इंडिया ने इस नए डिजाइन को भारत के गौरव और सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर पेश किया है, लेकिन खेल जगत और राजनीतिक गलियारों में इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
जर्सी के रंग पर खेल और राजनीति के बीच छिड़ी जंग
जैसे ही हॉकी इंडिया ने सोशल मीडिया पर नई जर्सी की तस्वीरें साझा कीं, पूर्व भारतीय कप्तान विरेन रास्किन्हा ने इस पर सवाल उठा दिए। उन्होंने पारंपरिक रंग को बदलने की आवश्यकता पर हैरानी जताई। वहीं, संसद के मानसून सत्र के दौरान यह मुद्दा पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस बदलाव को लेकर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर सीधा हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार चाहे जर्सी का रंग बदले या इतिहास को नए सिरे से लिखने का प्रयास करे, देश का युवा अब सब कुछ समझ रहा है। विपक्ष का आरोप है कि खेल के मैदान पर भी एक विशेष विचारधारा थोपने की कोशिश की जा रही है।
हॉकी इंडिया ने बताया जर्सी बदलने का तकनीकी कारण
विवाद बढ़ता देख हॉकी इंडिया ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस बदलाव के पीछे के तर्क स्पष्ट किए हैं। संस्था के अनुसार, यह निर्णय रातों-रात नहीं लिया गया, बल्कि इसमें खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ की विस्तृत राय शामिल है। जर्सी का रंग बदलने के पीछे सबसे मुख्य कारण तकनीकी बताया गया है। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आजकल हॉकी के मुकाबले नीले रंग की सिंथेटिक पिच पर खेले जाते हैं। नीली जर्सी और नीली पिच का रंग एक जैसा होने के कारण खिलाड़ियों को मैदान पर एक-दूसरे को साफ-साफ देखने और गेंद की स्थिति का सही अंदाजा लगाने में कठिनाई होती थी। विजिबिलिटी की इसी समस्या को दूर करने के लिए जर्सी के रंग को पिच के रंग से बिल्कुल अलग रखने का फैसला किया गया।
केसरिया रंग का प्रतीकात्मक महत्व और खिलाड़ियों का फीडबैक
हॉकी इंडिया ने स्पष्ट किया कि कोच और खिलाड़ियों ने पीले और केसरिया जैसे चटकीले रंगों का सुझाव दिया था। गहन विचार-विमर्श के बाद केसरिया रंग को इसलिए चुना गया क्योंकि यह हमारे राष्ट्रीय ध्वज का प्रमुख हिस्सा है। यह रंग साहस, त्याग और जीत के जज्बे को प्रदर्शित करता है। संस्था का मानना है कि यह रंग खिलाड़ियों के भीतर राष्ट्र के प्रति गौरव की भावना को और अधिक प्रबल करेगा। साथ ही, जर्सी के डिजाइन में भी बदलाव किया गया है ताकि खिलाड़ी मैदान पर अलग और प्रभावशाली नजर आएं।
पुरानी परंपराओं का हवाला और भविष्य की तैयारी
हॉकी इंडिया ने यह भी याद दिलाया कि भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग बदलना कोई नई घटना नहीं है। समय और परिस्थितियों की मांग के अनुसार पहले भी कई बार किट के रंगों में प्रयोग किए गए हैं। उदाहरण के तौर पर, साल 2014 के हॉकी वर्ल्ड कप के दौरान भारतीय टीम ने पीले रंग की जर्सी पहनी थी। इसके बाद 2018 के वर्ल्ड कप में जर्सी का रंग बदलकर आसमानी नीला कर दिया गया था। संस्था ने अपील की है कि इस बदलाव को विवाद के चश्मे से देखने के बजाय खिलाड़ियों की सुविधा और तकनीकी आवश्यकता के रूप में देखा जाना चाहिए। फिलहाल, 15 से 30 अगस्त तक चलने वाले इस विश्व कप में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर सबकी नजरें टिकी होंगी।
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