Punjab: नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने पर पंजाब सरकार सख्त अब माता-पिता और अभिभावकों पर भी गिरेगी गाज

चंडीगढ़, 21 जुलाई। पंजाब की सड़कों को सुरक्षित बनाने और सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक बड़ा और कड़ा निर्णय लिया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने की घटनाओं को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वित्त एवं परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस संबंध में सख्त चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि कोई कम उम्र का बच्चा वाहन चलाते हुए पाया गया, तो इसके लिए केवल वह बच्चा ही जिम्मेदार नहीं होगा। इस गंभीर लापरवाही के लिए बच्चे के माता-पिता, अभिभावक या उस वाहन के मालिक के खिलाफ भी कठोर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।


नाबालिगों की ड्राइविंग पर सरकार के नए और सख्त नियम
परिवहन विभाग ने इस समस्या से निपटने के लिए नियमों को और अधिक कठोर बना दिया है। नए प्रावधानों के तहत पकड़े जाने पर निम्नलिखित कार्रवाइयां सुनिश्चित की जाएंगी:

  1. नियम का उल्लंघन करने पर मौके पर ही भारी-भरकम जुर्माना वसूला जाएगा।

  2. जिस वाहन को नाबालिग चला रहा होगा, उसका पंजीकरण (आरसी) तत्काल प्रभाव से रद्द किया जा सकता है।

  3. सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि वाहन चलाने वाले नाबालिग को 25 वर्ष की आयु पूरी होने तक ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। यानी वह युवा होने के बाद भी लंबे समय तक वैध लाइसेंस नहीं बनवा सकेगा।


सड़क सुरक्षा से कोई समझौता नहीं: हरपाल सिंह चीमा
परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सरकार के इस रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा राज्य सरकार के लिए प्राथमिकता का विषय है और इससे किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि नाबालिगों द्वारा ड्राइविंग करना केवल यातायात नियमों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह सड़क पर चलने वाले अन्य निर्दोष लोगों की जान के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य जुर्माना वसूलना या राजस्व जुटाना नहीं है, बल्कि समाज में जिम्मेदारी का भाव पैदा करना और कीमती जानों को बचाना है।


अभिभावकों से अपील और बच्चों की जिद पर रोक
अक्सर देखा जाता है कि माता-पिता अपने बच्चों के शौक या उनकी जिद के आगे झुककर उन्हें कम उम्र में ही मोटरसाइकिल या कार थमा देते हैं। हरपाल सिंह चीमा ने अभिभावकों से विशेष अपील की है कि वे बच्चों की ऐसी खतरनाक मांग को पूरा न करें। उन्होंने कहा कि अभिभावकों का एक गलत फैसला उनके बच्चों और दूसरों के लिए किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। यदि घर के बड़े सदस्य स्वयं जागरूक और सतर्क रहेंगे, तो समाज में सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों में भारी गिरावट आ सकती है। सरकार चाहती है कि माता-पिता अपने बच्चों को वाहन सौंपने से पहले उसके कानूनी और सुरक्षा संबंधी परिणामों पर विचार करें।


पूरे प्रदेश में चलेगा विशेष जांच अभियान
परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, एक बड़ी संख्या में सड़क हादसे ऐसे चालकों के कारण होते हैं जिनके पास या तो लाइसेंस नहीं होता या फिर उनकी उम्र कम होती है। इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए सरकार आने वाले दिनों में पूरे पंजाब में एक विशेष जांच अभियान चलाने की तैयारी में है। इस अभियान के दौरान पुलिस और परिवहन विभाग की टीमें बिना किसी भेदभाव के नियमों का उल्लंघन करने वालों की पहचान करेंगी। विभाग का मानना है कि इन सख्त नीतियों के लागू होने के बाद नाबालिगों के सड़क पर वाहन लेकर निकलने की घटनाओं में प्रभावी रूप से कमी आएगी और वाहन मालिक अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से समझेंगे।

 

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