नई दिल्ली, 21 जुलाई। नीट पेपर लीक मामले और छात्रों के देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों को लेकर केंद्र सरकार पर विपक्ष के हमले और तेज हो गए हैं। विपक्ष के कड़े रुख और संसद के भीतर लगातार जारी हंगामे के बाद सरकार आखिरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर सदन में बहस करने के लिए तैयार हो गई है। बुधवार को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में घोषणा की कि सरकार नीट परीक्षा में हुई अनियमितताओं और पेपर लीक से जुड़ी चिंताओं पर विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह से तैयार है।
सरकार ने कहा छात्र हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता
विपक्षी सांसदों की नारेबाजी और भारी शोर-शराबे के बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि छात्र और उनका भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार इस मुद्दे की गंभीरता को समझती है और चाहती है कि सदन में इस पर विस्तार से चर्चा हो ताकि सभी तथ्यों को सामने रखा जा सके। हालांकि, सरकार की इस घोषणा के बाद भी सदन में शांति नहीं लौटी और विपक्ष ने अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाना जारी रखा।
प्रधानमंत्री के बयान पर अड़े अखिलेश यादव
संसद में चर्चा के प्रस्ताव के बावजूद विपक्ष ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मामले में सीधे प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप और बयान की मांग की। अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें वहां बैठने के लिए इसलिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि प्रधानमंत्री संसद के भीतर युवाओं के सवालों का जवाब नहीं दे रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रधानमंत्री संसद के बाहर युवाओं के मुद्दों पर बात कर सकते हैं, तो वे सदन की गरिमा के अनुरूप भीतर आकर अपनी बात क्यों नहीं रखते?
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
चर्चा के लिए सरकार के सहमत होने के बाद भी विपक्ष का रुख नरम नहीं पड़ा। विपक्षी दल इस बात पर अड़े रहे कि किसी भी बहस से पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना होगा। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कड़े शब्दों में कहा कि चर्चा तभी सार्थक हो सकती है जब पहले जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने मांग की कि इस महाघोटाले की नैतिक और राजनीतिक जिम्मेदारी लेते हुए धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत अपना पद छोड़ देना चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि राजधानी की सड़कों पर छात्रों के साथ पुलिस ने बर्बरता की है, जिसका जवाब सरकार को देना ही होगा।
हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही स्थगित
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने का प्रयास किया और दोनों पक्षों को चर्चा शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि जब सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही इस मुद्दे पर बहस चाहते हैं, तो प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। हालांकि, विपक्ष ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी तेज कर दी और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। सदन में बढ़ते गतिरोध और हंगामे को देखते हुए ओम बिरला ने अंततः सदन की कार्यवाही को स्थगित करने का फैसला किया। इस प्रकार नीट पेपर लीक पर होने वाली महत्वपूर्ण चर्चा विपक्षी जिद और सरकारी प्रस्ताव के बीच उलझकर रह गई।
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