नई दिल्ली, 21 जुलाई। नीट परीक्षा के पेपर लीक और देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च सोमवार को हिंसक हो गया। जंतर-मंतर पर पिछले एक महीने से शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा यह विरोध प्रदर्शन उस समय उग्र रूप ले लिया जब प्रदर्शनकारी संसद भवन की ओर बढ़ने लगे। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई भीषण झड़प में 100 से अधिक पुलिसकर्मी और दर्जनों युवा घायल हो गए हैं।
हिंसा और तोड़फोड़ मामले में कानूनी कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने सोमवार को हुई हिंसा और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। अब तक कनॉट प्लेस और पार्लियामेंट स्ट्रीट समेत विभिन्न पुलिस स्टेशनों में कुल पांच एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिए उन दंगाइयों की पहचान कर रही है जिन्होंने वाहनों में तोड़फोड़ की और पुलिस बल पर पथराव किया। पुलिस का कहना है कि आने वाले समय में कुछ और एफआईआर दर्ज हो सकती हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पथराव और लाठीचार्ज में भारी संख्या में लोग घायल
प्रदर्शन के दौरान हालात तब बेकाबू हो गए जब फिरोज शाह रोड पर प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। इस झड़प में कुल 118 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जबकि लाठीचार्ज के कारण लगभग 60 प्रदर्शनकारियों को चोटें आई हैं। पुलिस ने अब तक 70 लोगों को हिरासत में लिया है। वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस द्वारा बल प्रयोग के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है।
सीजेपी की तीन प्रमुख मांगें और आंदोलन की रणनीति
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है और प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर डटे रहेंगे। पार्टी ने सरकार के सामने तीन मुख्य शर्तें रखी हैं: सोनम वांगचुक की तुरंत रिहाई, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और नीट पेपर लीक के तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा। पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रंका ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं और छात्रों के साथ गुंडों जैसा व्यवहार किया गया।
बॉर्डर पर सुरक्षा और यातायात का संकट
आंदोलन की आंच दिल्ली की सीमाओं तक पहुंच गई है। मंगलवार सुबह से ही डीएनडी और चिल्ला बॉर्डर पर वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं, जिससे दफ्तर जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। गाजियाबाद पुलिस ने भी सुरक्षा के मद्देनजर यूपी गेट, महाराजपुर और सीमापुरी बॉर्डर पर भारी पुलिस बल तैनात किया है और दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाहनों की सघन चेकिंग की जा रही है। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए जंतर-मंतर के आसपास के इलाकों को खाली कराने की कोशिश की है, लेकिन प्रदर्शनकारी अब भी वहां डटे हुए हैं।
नेताओं का जमावड़ा और स्वास्थ्य अपडेट
प्रदर्शन में घायल हुए युवाओं का हाल जानने के लिए आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचे। इसके साथ ही आम आदमी पार्टी के सांसदों ने भी पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। दूसरी ओर, भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य अपडेट भी जारी किया गया है। उनके महत्वपूर्ण पैरामीटर फिलहाल स्थिर बताए जा रहे हैं, हालांकि डॉक्टरों ने उनके ब्लड शुगर के गिरते स्तर पर चिंता जताई है। फिलहाल जंतर-मंतर पर भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
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