Uttarpradesh: चुनाव से पहले हिंदुत्व की पिच पर भिड़े सपा और भाजपा मंदिर और आस्था के बहाने जारी है पोस्टर वॉर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में प्रभु श्रीराम और उनकी आस्था से जुड़े मुद्दे एक बार फिर राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। इस बार लड़ाई केवल मंदिर निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘चढ़ावा चोरी’ और ‘हिंदुत्व के असली पैरोकार’ होने के दावों के इर्द-गिर्द सिमट गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच इंटरनेट मीडिया से लेकर सड़कों तक एक बड़ा ‘नैरेटिव वॉर’ (धारणा बनाने की जंग) छिड़ गया है। जहाँ अखिलेश यादव भाजपा को उसकी ही मजबूत पिच पर घेरने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं भाजपा सपा के अतीत को हथियार बनाकर पलटवार कर रही है।

सपा मुखिया अखिलेश यादव इस बार एक नई रणनीति के साथ मैदान में हैं। वे खुद को सनातन धर्म और हिंदू आस्था के रक्षक के रूप में पेश कर रहे हैं। मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले को उन्होंने सबसे पहले उठाकर भाजपा को रक्षात्मक स्थिति में लाने का प्रयास किया। सपा का आरोप है कि भाजपा ने श्रद्धालुओं की आस्था के साथ विश्वासघात किया है। अखिलेश यादव ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर ‘क्या फिर से चले गए वनवास’ जैसा गीत साझा कर भाजपा पर सीधा हमला बोला है। इसके साथ ही, एआई वीडियो और मीम्स के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि भाजपा के शासन में धार्मिक मूल्यों का पतन हुआ है।

भाजपा का पलटवार और अतीत की याद
भाजपा इस चुनौती को हल्के में नहीं ले रही है। पार्टी एक सोची-समझी रणनीति के तहत सपा को उसके पुराने इतिहास के आईने में खड़ा कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित भाजपा के दिग्गज नेता लगातार 1990 के मंदिर आंदोलन की याद दिला रहे हैं। कारसेवकों पर गोली चलवाने और हनुमान गढ़ी में नमाज पढ़वाने जैसे आरोपों को फिर से हवा दी जा रही है। राजधानी लखनऊ सहित कई शहरों में ऐसे पोस्टर लगाए गए हैं जिन पर ‘दिल में बाबर, मुंह में राम’ जैसे तीखे स्लोगन लिखे हैं। भाजपा का मुख्य उद्देश्य यह साबित करना है कि सपा का ‘राम प्रेम’ केवल चुनावी दिखावा है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर छिड़ी है बड़ी जंग
सोशल मीडिया पर दोनों दलों के आईटी सेल सक्रिय हैं। पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और सपा महासचिव रामगोपाल यादव के पुराने वीडियो बड़ी मात्रा में प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनमें वे मंदिर आंदोलन के प्रति अपना विरोध जता रहे हैं। इसके जवाब में सपा समर्थक भाजपा नेताओं के उन कार्यक्रमों के वीडियो साझा कर रहे हैं जहाँ कथित तौर पर धार्मिक मर्यादाओं का उल्लंघन हुआ है। हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्वागत में हनुमान की प्रतिकृति के नृत्य को लेकर सपा ने भाजपा को आड़े हाथों लिया और इसे आराध्य का अपमान बताया।

चुनाव से पहले और तेज होगी तपिश
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अखिलेश यादव की अयोध्या यात्रा और इटावा में बन रहे केदारेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण उनकी ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की छवि को और मजबूत करेगा। सपा को लगता है कि यदि वे भाजपा के पारंपरिक मतदाता वर्ग में सेंध लगाने में सफल रहे, तो सत्ता की राह आसान हो सकती है। दूसरी ओर, भाजपा को अपने ‘कोर हिंदुत्व’ एजेंडे पर पूरा भरोसा है और वह इसे कमजोर नहीं होने देना चाहती। विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आएंगे, आस्था और राजनीति का यह घालमेल उत्तर प्रदेश के सियासी तापमान को और अधिक बढ़ाएगा।

 

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