लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चलाए गए 35 करोड़ पौधारोपण महाअभियान में शिक्षा विभाग ने अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराई है। विभाग के विभिन्न अंगों ने मिलकर प्रदेश भर में 43 लाख से अधिक पौधे लगाए, जो इस हरित अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना। इस महाअभियान में बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। जहां एक ओर सरकारी तंत्र इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि मान रहा है, वहीं विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने इसे भ्रष्टाचार का जरिया बताते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिक्षा विभाग द्वारा किए गए पौधारोपण की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, उच्च शिक्षा विभाग इस अभियान में सबसे आगे रहा। राज्य के राजकीय, सहायता प्राप्त और निजी महाविद्यालयों के साथ-साथ विश्वविद्यालयों में कुल 20 लाख पौधे रोपे गए। बेसिक शिक्षा विभाग ने भी अपनी सक्रियता दिखाते हुए करीब 12 लाख पौधे लगाए। ये पौधे परिषदीय विद्यालयों, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों, ब्लॉक संसाधन केंद्रों और अन्य शैक्षणिक परिसरों में लगाए गए। इस दौरान छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन समितियों के साथ स्थानीय अभिभावकों ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी की।
अभियान की नोडल अधिकारी और महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने झांसी में खुद पौधारोपण कार्यक्रमों का निरीक्षण किया और जनभागीदारी की सराहना की। माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्तर पर भी 11 लाख पौधे राजकीय, सहायता प्राप्त, वित्तविहीन और संस्कृत विद्यालयों में लगाए गए। राजधानी लखनऊ में भी वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न कार्यालय परिसरों में पौधे लगाकर पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई।
विपक्ष का हमला और ‘भ्रष्टारोपण’ का आरोप
सरकार के इस भव्य आयोजन पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस अभियान को ‘पौधारोपण’ के बजाय ‘भ्रष्टारोपण’ करार दिया। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि 35 करोड़ पौधे लगाने का दावा दरअसल एक बड़ी आर्थिक लूट की योजना है। उनके अनुसार, यह प्रत्येक पौधे पर कम से कम 10 रुपये कमाने की गुप्त रणनीति है, जिससे कुल मिलाकर 350 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार किया जा रहा है।
अखिलेश यादव ने अपने बयान में तंज कसते हुए कहा कि भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है और हर विभाग में लूट मची हुई है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में सरकार ने केवल कागजों पर ही पौधे लगाए हैं, जबकि धरातल पर स्थिति इसके विपरीत है। उन्होंने नदियों की सफाई के मुद्दे पर भी सरकार को घेरते हुए कहा कि गंगा और अन्य नदियों की स्वच्छता के नाम पर आया बजट भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। विपक्षी नेता ने पेड़ों की निरंतर कटाई से पर्यावरण पर मंडरा रहे संकट की ओर भी ध्यान आकर्षित किया।
सरकार और विपक्ष के बीच इस जुबानी जंग ने पौधारोपण अभियान को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। जहां प्रशासन इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य का निर्माण बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे सरकारी धन के दुरुपयोग का बड़ा जरिया मान रहा है।