Uttarakhand: कोर्ट के आदेश के बावजूद मुआवजा न मिलने से भड़के ग्रामीण ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना के खिलाफ आंदोलन शुरू – The Hill News

Uttarakhand: कोर्ट के आदेश के बावजूद मुआवजा न मिलने से भड़के ग्रामीण ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना के खिलाफ आंदोलन शुरू

श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) द्वारा किए जा रहे भूमि अधिग्रहण से प्रभावित तीन गांवों के निवासियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। अपनी जायज मांगों और कानूनी अधिकारों की अनदेखी से नाराज जनासू, खिलगढ़ मल्ला और खिलगढ़ तल्ला के ग्रामीणों ने सोमवार से सामूहिक आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।

ग्रामीणों की मुख्य मांग अधिग्रहित भूमि के बदले नियमानुसार चार गुना मुआवजा और उस पर देय 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे पिछले लंबे समय से अपनी इस मांग को लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन प्रशासन और परियोजना अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।

अदालत के आदेशों की अवहेलना का आरोप
आंदोलनकारियों का सबसे गंभीर आरोप यह है कि उच्च न्यायालय ने उनके पक्ष में स्पष्ट आदेश जारी किए हैं, लेकिन इसके बावजूद रेल विकास निगम लिमिटेड और स्थानीय प्रशासन उन आदेशों को लागू करने में टालमटोल कर रहा है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि न्यायालय ने प्रभावित किसानों को निर्धारित दर पर प्रतिकर और ब्याज देने का निर्देश दिया था। शासन की इस कथित हठधर्मी और अदालती आदेशों की अवहेलना ने ग्रामीणों के भीतर भारी असंतोष पैदा कर दिया है।

ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी उपजाऊ भूमि और पुश्तैनी संपत्तियां राष्ट्रहित की इस परियोजना के लिए सहर्ष समर्पित की थीं। उन्हें उम्मीद थी कि सरकार उनके हितों की रक्षा करेगी, लेकिन वर्तमान स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं, जिससे दर्जनों प्रभावित परिवार अब आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव के दौर से गुजर रहे हैं।

आंदोलन को उग्र करने की चेतावनी
श्रीनगर गढ़वाल में धरना स्थल पर जुटे ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यह आंदोलन तब तक समाप्त नहीं होगा, जब तक कि प्रत्येक प्रभावित किसान के बैंक खाते में चार गुना मुआवजा और 12 प्रतिशत ब्याज की राशि जमा नहीं हो जाती। आंदोलनकारियों ने दो टूक कहा कि यदि आगामी कुछ दिनों के भीतर प्रशासन की ओर से कोई ठोस और सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो इस प्रदर्शन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा।

ग्रामीणों के अनुसार, यदि भविष्य में किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति पैदा होती है या आंदोलन हिंसक मोड़ लेता है, तो उसकी पूरी जवाबदेही राज्य सरकार और संबंधित विभाग की होगी। इस दौरान आंदोलन में शामिल महिलाओं और बुजुर्गों ने भी प्रशासन के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की और अपने हक की लड़ाई को अंतिम सांस तक लड़ने का संकल्प दोहराया।

गौरतलब है कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन उत्तराखंड की पहाड़ियों में कनेक्टिविटी सुधारने का एक बड़ा माध्यम है, लेकिन भूमि अधिग्रहण और मुआवजे के मुद्दों ने स्थानीय जनता और निर्माण एजेंसियों के बीच एक गहरी खाई पैदा कर दी है। श्रीनगर क्षेत्र के ये तीन गांव अब इस संघर्ष का चेहरा बन गए हैं। फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस नए घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे ग्रामीणों में और भी अधिक गुस्सा देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद परियोजना की रफ्तार को भी प्रभावित कर सकता है।

 

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