लखनऊ। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे में कथित गबन के मामले में गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी जांच का पहला चरण पूरा कर लिया है। मंगलवार को एसआईटी ने इस संबंध में अपनी विस्तृत रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंप दी है। हालांकि, शासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि जांच की कार्यवाही अभी प्रचलित है, जिसका अर्थ है कि यह कोई अंतिम रिपोर्ट नहीं है और इस संवेदनशील मामले में तफ्तीश का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
अयोध्या के इस बहुचर्चित प्रकरण को लेकर एसआईटी ने पिछले कई दिनों से विभिन्न स्तरों पर सघन जांच की थी। जांच टीम ने न केवल दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की, बल्कि मंदिर व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण व्यक्तियों से लंबी पूछताछ भी की। प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को मिलने के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भ्रष्टाचार के इन गंभीर आरोपों पर सरकार क्या अगला कदम उठाती है।
छह दिनों की जांच में सामने आईं कई बड़ी खामियां
विशेष जांच दल ने गत 15 जून से अपनी कार्यवाही शुरू की थी। इस दौरान टीम ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय, डॉक्टर अनिल मिश्र और व्यवस्थापक गोपाल राव से मंदिर की आंतरिक व्यवस्थाओं और नकदी प्रबंधन के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल की। जांच के दायरे में न केवल ट्रस्ट के पदाधिकारी आए, बल्कि नकदी की गणना करने वाले कर्मियों और बैंक अधिकारियों समेत लगभग 150 लोगों के बयान दर्ज किए गए।
एसआईटी की पड़ताल में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि मंदिर के दानपात्रों की महत्वपूर्ण चाबियां किसी जिम्मेदार ट्रस्टी या अधिकृत अधिकारी के बजाय चंपतराय के पूर्व चालक रामशंकर यादव टिन्नू के पास रहती थीं। सुरक्षा और वित्तीय प्रबंधन के लिहाज से इसे एक बड़ी प्रशासनिक चूक माना जा रहा है।
बयानों में विरोधाभास और संदिग्धों से पूछताछ
जांच के दौरान जब रामशंकर यादव टिन्नू और ट्रस्टी अनिल मिश्र के बयान लिए गए, तो उनमें काफी असमानता पाई गई। बयानों में मिलान न होने के कारण एसआईटी ने इन दोनों को आमने-सामने बैठाकर और अलग-अलग बुलाकर लगातार तीन दिनों तक कड़ी पूछताछ की। इसके अतिरिक्त, जांच दल ने 14 ऐसे लोगों की पहचान की है जिनके कार्य संदिग्ध पाए गए हैं। इनमें अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, राजेश पाठक, अविनाश शुक्ल, कृष्णदेव तिवारी और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। इन सभी से लिखित बयान लिए गए हैं और उनके बैंक खातों के विवरण की भी जांच की जा रही है।
जांच के मुख्य बिंदु और वर्तमान स्थिति
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बयानों का मिलान: लगभग 150 लोगों से पूछताछ की गई, जिनमें ट्रस्ट के सदस्य और बैंक कर्मचारी शामिल हैं।
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चाबियों का प्रबंधन: दानपात्रों की चाबियां ड्राइवर रामशंकर यादव टिन्नू के पास मिलना जांच का मुख्य केंद्र बना।
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संदिग्धों की सूची: ट्रस्ट और बैंक से जुड़े 14 लोगों के लिखित बयान दर्ज किए गए।
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प्रारंभिक रिपोर्ट: मंगलवार को अपर मुख्य सचिव (गृह) को रिपोर्ट सौंपी गई, जिसमें अब तक मिली वित्तीय अनियमितताओं का जिक्र है।
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आगे की कार्रवाई: शासन अब इस रिपोर्ट का अध्ययन करेगा और जांच जारी रहने तक नई साक्ष्य जुटाए जाएंगे।
अयोध्या में चढ़ावा प्रकरण सामने आने के बाद से ही धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में एसआईटी अब बैंक ट्रांजेक्शन और मंदिर के ऑडिट रिकॉर्ड्स को खंगाल रही है ताकि गबन की वास्तविक राशि और इसमें शामिल चेहरों का पर्दाफाश किया जा सके। शासन को सौंपी गई इस रिपोर्ट के आधार पर आने वाले समय में कुछ बड़े नामों पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।