तेहरान/वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध और संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। दोनों देशों के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर सहमति बन गई है, जिस पर आगामी 19 जून को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप इस समझौते को लेकर काफी गंभीर नजर आ रहे हैं, जिसका प्रमाण यह है कि अमेरिका ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर का विशाल आर्थिक पैकेज देने को तैयार हो गया है।
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘मेहर’ ने इस शांति समझौते से जुड़े 14 सूत्रीय मसौदे को सार्वजनिक किया है। हालांकि, वॉशिंगटन या तेहरान ने अभी तक इस दस्तावेज को आधिकारिक तौर पर जारी नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि डोनल्ड ट्रंप और ईरानी अधिकारियों के बीच हुई प्रारंभिक सहमति ही इस व्यापक शांति प्रक्रिया का आधार है। महीनों तक चली इस गुप्त और गहन चर्चा को “इस्लामाबाद वार्ता” का नाम दिया गया है, जो इस समझौते में पाकिस्तान की मध्यस्थता की अहम भूमिका को दर्शाता है।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने पुष्टि की है कि समझौते का मसौदा 14 जून की शाम को फाइनल कर लिया गया था। परिषद के अनुसार, इस समझौते के तहत लेबनान सहित सभी युद्ध मोर्चों पर सैन्य कार्रवाइयां तुरंत और स्थाई रूप से बंद कर दी जाएंगी। साथ ही, ईरान के खिलाफ की गई नौसैनिक नाकेबंदी को भी तत्काल प्रभाव से हटा लिया जाएगा।
शांति समझौते के 14 मुख्य बिंदु
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लेबनान समेत सभी सक्रिय मोर्चों पर सैन्य अभियानों का पूर्णतः अंत।
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अमेरिका द्वारा ईरान की संप्रभुता का सम्मान और उसके आंतरिक मामलों में दखल न देने का आश्वासन।
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30 दिनों के भीतर ईरान के खिलाफ लगी समुद्री नाकेबंदी को पूरी तरह समाप्त करना।
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ईरान के पड़ोसी क्षेत्रों और समुद्री सीमाओं से अमेरिकी सेना की क्रमिक वापसी।
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होर्मुज स्ट्रेट को ईरानी प्रबंधन के तहत अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए दोबारा खोलना।
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ईरानी तेल, पेट्रोकेमिकल और अन्य उत्पादों के निर्यात पर लगी सभी पाबंदियों को हटाना।
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ऊर्जा निर्यात से होने वाली आय और विदेशी मुद्रा तक ईरान की पूरी पहुंच सुनिश्चित करना।
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ईरान के बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए अमेरिका और सहयोगियों द्वारा 300 अरब डॉलर की योजना।
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परमाणु मुद्दों और प्रतिबंधों में बड़ी राहत के लिए 60 दिनों की अतिरिक्त वार्ता प्रक्रिया।
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परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के तहत परमाणु हथियार न बनाने की ईरान की प्रतिबद्धता।
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वार्ता के दौरान क्षेत्र में नई सैन्य तैनाती न करने और नए प्रतिबंध न लगाने का वादा।
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ईरान की फ्रीज की गई 24 अरब डॉलर की संपत्ति को जारी करना (आधी रकम वार्ता शुरू होने से पहले)।
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समझौते की शर्तों के क्रियान्वयन की जांच के लिए एक विशेष निगरानी तंत्र का गठन।
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के जरिए अंतिम समझौते को वैश्विक मंजूरी दिलाना।
परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा अभी भी पेचीदा
यद्यपि डोनल्ड ट्रंप ने इस समझौते को युद्ध की समाप्ति बताया है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम से जुड़े सबसे विवादित मुद्दे अभी भी पूरी तरह सुलझे नहीं हैं। मसौदे में परमाणु हथियार न बनाने की बात तो है, लेकिन यूरेनियम संवर्धन की सीमा और मौजूदा परमाणु केंद्रों के भविष्य पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। इन विषयों पर आगामी 60 दिनों की वार्ता के दौरान चर्चा होने की उम्मीद है।
ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि अंतिम विस्तृत बातचीत तभी शुरू होगी जब अमेरिका मसौदे में किए गए अपने शुरुआती वादों को पूरा कर देगा। ईरान ने शर्त रखी है कि उसकी जमे हुए फंड का आधा हिस्सा जारी किया जाए और तेल निर्यात पर से प्रतिबंध हटाए जाएं। फिलहाल, इस समझौते ने वैश्विक स्तर पर युद्ध के खतरों को कम कर एक नई उम्मीद जगाई है।
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