रुड़की। सहारनपुर में पाकिस्तानी गैंगस्टर के संपर्क में रहने वाले मुशर्रफ की गिरफ्तारी ने रुड़की और आसपास के इलाकों में एक बार फिर पुराने जख्मों और संदिग्ध आतंकी गतिविधियों की यादें ताजा कर दी हैं। ढंडेरा निवासी मुशर्रफ की इस गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियां एक बार फिर उन कड़ियों को जोड़ने में जुट गई हैं, जो पिछले एक दशक से क्षेत्र की शांति के लिए खतरा बनी हुई हैं। यह मामला सामने आने के बाद वर्ष 2016 की वह खौफनाक घटना फिर से चर्चा में है, जिसने हरिद्वार और रुड़की को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर ला दिया था।
साल 2016 में, जब हरिद्वार में अर्द्धकुंभ का आयोजन हो रहा था, तब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़ी गुप्त कार्रवाई की थी। उस समय पुलिस ने लंढौरा क्षेत्र से चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया था, जिनके तार आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने की आशंका थी। पकड़े गए आरोपियों की पहचान अखलाक, मेहराज, अजीम और ओसमा के रूप में हुई थी, जो लंढौरा और जौरासी गांव के निवासी थे। इन आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने जौरासी के जंगलों से भारी मात्रा में बारूद और विस्फोटक सामग्री बरामद की थी।
जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए थे, वे बेहद चौंकाने वाले थे। ये संदिग्ध आतंकी जौरासी गांव में एक ट्यूबवेल की छत पर बम बनाने का काम करते थे। उनकी साजिश को अंजाम देने का तरीका इतना शातिराना था कि वे बमों का परीक्षण करने के लिए रेलगाड़ी के गुजरने का इंतजार करते थे। जब पास से ट्रेन गुजरती थी और उसका शोर चरम पर होता था, तभी वे बम धमाका करते थे ताकि धमाके की आवाज ट्रेन के शोर में दब जाए और किसी को इसकी भनक न लगे।
रुड़की के इतिहास में एक और काला दिन 6 दिसंबर 2014 का है, जो आज भी एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है। उस दिन डीएवी कॉलेज के मैदान में शौर्य दिवस के मौके पर एक बड़ी जनसभा का आयोजन होना था, जिसमें भाजपा के कद्दावर नेता संगीत सोम और सुरेश राणा शिरकत करने वाले थे। इसी दौरान वहां एक भीषण बम धमाका हुआ, जिसमें राजकीय इंटर कॉलेज के छात्र तुषार धीमान की जान चली गई थी। इस धमाके की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपी गई थी। एनआईए ने इस मामले में तीन हजार से भी अधिक लोगों से पूछताछ की, लेकिन अफसोस की बात यह है कि आज तक उस धमाके के गुनहगारों का सुराग नहीं मिल सका है।
हाल ही में गिरफ्तार हुए मुशर्रफ के बारे में जानकारी मिली है कि उसका परिवार लगभग 15 साल पहले ही सहारनपुर के सरदेहड़ी गांव में जाकर बस गया था। वहां उसका अपना मकान है, लेकिन वह अक्सर बंद ही रहता है। मुशर्रफ पेशे से वेल्डिंग का काम करता था और उसका रुड़की आना-जाना बहुत कम था। करीब दो साल पहले ही वह कुछ दिनों के लिए अपने पैतृक क्षेत्र में आया था। पाकिस्तानी गैंगस्टरों के साथ उसके संबंधों ने अब खुफिया विभागों की नींद उड़ा दी है।
इन घटनाओं के क्रम को देखें तो साफ होता है कि रुड़की और उसके आसपास के ग्रामीण इलाके समय-समय पर असामाजिक और राष्ट्रविरोधी तत्वों की शरणस्थली बनते रहे हैं। मुशर्रफ की गिरफ्तारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर सक्रिय होकर सीमा पार की साजिशों को अंजाम देने वाले नेटवर्क अभी भी सक्रिय हो सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियों के लिए अब इन पुराने और नए मामलों के बीच की कड़ियों को सुलझाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
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