देहरादून। उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में ‘प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण’ (पीएम पोषण) योजना को लेकर राज्य स्तरीय क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में योजना की वर्तमान प्रगति की समीक्षा की गई और आगामी वित्तीय वर्ष के लिए कई बड़े निर्णय लिए गए। मुख्य सचिव ने योजना की पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए अधिकारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।
बैठक के दौरान आनंद बर्द्धन ने पीएम पोषण योजना के तहत प्रदेश के अधिक से अधिक स्कूलों का ‘सोशल ऑडिट’ कराए जाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सोशल ऑडिट वह प्रक्रिया है जिससे धरातल पर योजना की वास्तविक स्थिति का पता चलता है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि जिन स्कूलों के सोशल ऑडिट में कमियां पाई गई हैं, उनके बारे में संबंधित जनपदों को तत्काल सूचित किया जाए। साथ ही, उन कमियों को दूर कर एक निश्चित समय सीमा के भीतर अनुपालन रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत की जाए।
योजना को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मुख्य सचिव ने विद्यालयों में बच्चों की ‘डिजिटल मैपिंग’ और ‘ट्रैकिंग मैकेनिज्म’ तैयार करने के निर्देश दिए। इस डिजिटल तंत्र के माध्यम से प्रत्येक छात्र के पोषण स्तर और स्वास्थ्य रिकॉर्ड की निगरानी की जा सकेगी। उन्होंने बच्चों की हेल्थ स्क्रीनिंग को अनिवार्य बनाने और विशेष रूप से एनीमिया (खून की कमी) जैसी बीमारियों से पीड़ित बच्चों के उपचार पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया कि केवल उपचार ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावित बच्चों का लगातार फॉलोअप भी किया जाना चाहिए ताकि उनकी सेहत में सुधार सुनिश्चित हो सके।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्कूलों का ‘स्थान विशेष विश्लेषण’ (लोकेशन स्पेसिफिक एनालिसिस) करने का सुझाव भी दिया। उनका मानना है कि अलग-अलग जनपदों या ब्लॉकों में बच्चों की स्वास्थ्य समस्याएं भिन्न हो सकती हैं। इस विश्लेषण से यह पता चल सकेगा कि किस क्षेत्र के बच्चों को किस तरह की पोषक सहायता की आवश्यकता है, जिससे उन क्षेत्रों में लक्षित और विशेष प्रयास किए जा सकें।
बैठक में सचिव रविनाथ रमन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भारत सरकार को भेजी जाने वाली वार्षिक कार्य योजना और बजट का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने विभाग द्वारा शुरू की गई कुछ नई और अभिनव पहलों की जानकारी भी साझा की। रविनाथ रमन ने बताया कि बच्चों के भोजन में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाने के लिए बागेश्वर और हरिद्वार जिलों की 78 भोजन माताओं को मशरूम की खेती का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इससे स्थानीय स्तर पर ही ताजे और प्रोटीन युक्त मशरूम मिड-डे मील में शामिल किए जा सकेंगे।
इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार ने उत्तराखंड सहकारी डेयरी फेडरेशन लिमिटेड के साथ मिलकर एक नई पहल की है। इसके तहत अब सरकारी स्कूलों के बच्चों को सप्ताह में दो बार फोर्टिफाइड फ्लेवर्ड स्किम्ड दूध उपलब्ध कराया जा रहा है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बच्चों में कैल्शियम और विटामिन्स की कमी को दूर कर उनके शारीरिक विकास में मदद करना है।
बैठक में सचिव रविनाथ रमन, चंद्रेश कुमार यादव, अपर सचिव नमामि बंसल, रोहित मीणा और विद्यालयी शिक्षा निदेशक मुकुल कुमार सती सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्य सचिव ने अंत में सभी अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और योजना का लाभ हर पात्र बच्चे तक पहुँचाने के निर्देश दिए। सरकार का यह नया रोडमैप राज्य के बच्चों के उज्ज्वल और स्वस्थ भविष्य की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
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