लखनऊ। उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संकल्प को पूरा करने की दिशा में राज्य सरकार ने दो वैश्विक दिग्गज संस्थाओं, टाटा टेक्नोलॉजीज और डेलॉयट के साथ हाथ मिलाया है। प्रदेश के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के काबिल बनाने और औद्योगिक प्रशिक्षण को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप ढालने के लिए एक व्यापक और भविष्यवादी रोडमैप तैयार किया जा रहा है। व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग की हालिया उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में दोनों कंपनियों ने राज्य की श्रमशक्ति को विश्वस्तरीय बनाने के लिए अपनी विस्तृत योजनाएं प्रस्तुत कीं।
टाटा टेक्नोलॉजीज की भूमिका मुख्य रूप से राज्य के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के कायाकल्प पर केंद्रित है। कंपनी सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत इन संस्थानों को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में अपग्रेड कर रही है। इस योजना के अंतर्गत युवाओं को ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग जैसी ‘इंडस्ट्री 4.0’ की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। संस्थानों में न केवल हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक मशीनें स्थापित की जा रही हैं, बल्कि एडवांस ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को जापान, जर्मनी और खाड़ी देशों जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों की तकनीकी मांगों को पूरा करने के लिए ‘इंडस्ट्री-रेडी’ बनाना है।
वहीं, विश्व प्रसिद्ध परामर्शदाता कंपनी डेलॉयट ने कौशल विकास को सीधे निवेश और अर्थव्यवस्था से जोड़ने की रणनीति पेश की है। डेलॉयट के विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य में आने वाले बड़े औद्योगिक निवेश का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब स्थानीय युवाओं के पास संबंधित उद्योगों के लिए आवश्यक कौशल होगा। डेलॉयट ने सुझाव दिया है कि उद्योगों की तात्कालिक मांग के अनुसार कस्टमाइज्ड स्किल कोर्स शुरू किए जाएं ताकि कंपनियों को निवेश करते ही कुशल कार्यबल प्राप्त हो सके। इसके अतिरिक्त, स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए तकनीक आधारित नए इनक्यूबेशन मॉडल विकसित करने पर भी जोर दिया गया है।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप उत्तर प्रदेश को आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए इन संस्थाओं की विशेषज्ञता का पूरा उपयोग किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि प्रस्तुत कार्ययोजनाओं को बिना किसी विलंब के धरातल पर उतारा जाए। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य युवाओं को केवल प्रमाण पत्र देना नहीं, बल्कि उन्हें ‘सर्टिफाइड प्रोफेशनल’ बनाना है जो आत्मनिर्भर होकर प्रदेश की उन्नति में योगदान दे सकें।
राज्य में पीपीपी मॉडल के जरिए कौशल विकास कार्यक्रमों को नया आयाम दिया जा रहा है। शिक्षा को किताबी ज्ञान के दायरे से बाहर निकालकर बाजार की मांग और रोजगार से जोड़ने का यह साझा प्रयास उत्तर प्रदेश को देश का सबसे मजबूत मानव संसाधन केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। टाटा टेक्नोलॉजीज और डेलॉयट की इस जुगलबंदी से प्रदेश के आईटीआई संस्थान अब वैश्विक स्तर के प्रशिक्षण केंद्र बनने की राह पर हैं, जिससे लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
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