शिमला। हिमाचल प्रदेश में गर्मी के तेवर तीखे होते ही जंगलों में आगजनी की घटनाएं तेजी से बढ़ने लगी हैं। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, केवल मई के महीने में ही अब तक आग लगने के 148 मामले सामने आ चुके हैं। आग की इन घटनाओं ने न केवल बेशकीमती वन संपदा को राख कर दिया है, बल्कि वन्य जीवों के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा कर दिया है।
आंकड़ों पर गौर करें तो आगजनी की सबसे अधिक घटनाएं धर्मशाला और नाहन जैसे क्षेत्रों में दर्ज की गई हैं, लेकिन नुकसान के मामले में शिमला सबसे आगे रहा है। शिमला सर्किल में हालांकि आगजनी की केवल चार घटनाएं ही रिपोर्ट हुईं, लेकिन इन चंद घटनाओं ने ही 1544.36 हेक्टेयर वन क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। वहीं मंडी में आगजनी की 24 घटनाओं में करीब 233 हेक्टेयर जंगल जलकर खाक हो गया। अन्य क्षेत्रों की बात करें तो नाहन में 337 हेक्टेयर, धर्मशाला में 51.3 हेक्टेयर, चंबा में 25.5 हेक्टेयर और बिलासपुर में 10 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। वाइल्ड लाइफ दक्षिण जोन में भी 45 हेक्टेयर जंगल आग की भेंट चढ़ गया।
इस वर्ष अप्रैल और मई के शुरुआती सप्ताह में हुई बारिश की वजह से आगजनी की घटनाएं काफी समय तक रुकी रहीं, लेकिन अब बढ़ते तापमान और सूखे के कारण जंगलों में आग तेजी से फैल रही है। विभाग की ओर से जारी सर्किलवार विवरण के अनुसार, धर्मशाला में 34, नाहन में 32, मंडी में 24 और हमीरपुर में 7 मामले दर्ज किए गए हैं। शिमला, सोलन, बिलासपुर और वाइल्ड लाइफ दक्षिण जोन में 4-4 मामले सामने आए हैं, जबकि चंबा और कुल्लू के ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में 2-2 घटनाएं हुई हैं।
जंगलों को आग से बचाने के लिए वन विभाग ने अब कमर कस ली है। अतिरिक्त मुख्य सचिव वन कमलेश कुमार पंत ने हाल ही में वन विभाग प्रमुख संजय सूद और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में फायर सीजन की चुनौतियों से निपटने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने अपने फील्ड स्टाफ की छुट्टियां तुरंत प्रभाव से रद्द कर दी हैं। सभी कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर समय सतर्क रहें और आग की सूचना मिलते ही राहत कार्य शुरू करें।
संवेदनशील क्षेत्रों की कड़ी निगरानी के लिए विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया है। विभाग ने जंगलों में नियमित गश्त के लिए फायर वॉचर तैनात किए हैं। इसके साथ ही, विभिन्न बीटों में वन मित्रों की नियुक्ति की गई है, जो विभागीय कर्मचारियों के साथ मिलकर आग बुझाने और स्थानीय लोगों को जागरूक करने का कार्य करेंगे। विभाग ने महिला मंडलों, युवक मंडलों और सामाजिक संस्थाओं के साथ भी बैठकें की हैं ताकि जनभागीदारी के माध्यम से जंगलों को सुरक्षित रखा जा सके। आम जनता की सुविधा के लिए कर्मचारियों के मोबाइल नंबर भी सार्वजनिक किए गए हैं, ताकि आग की सूचना तुरंत विभाग तक पहुंच सके।
पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों की तुलना करें तो वर्ष 2024-25 में आगजनी के सर्वाधिक 2433 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि वर्ष 2025-26 में यह संख्या 276 रही थी। वर्तमान सीजन 2026-27 में अब तक 148 मामले सामने आए हैं। विभाग का प्रयास है कि त्वरित कार्रवाई और जनसहयोग से इस संख्या को और बढ़ने से रोका जाए।
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