अमृतसर। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने पंजाब
विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां को तलब किया है। यह महत्वपूर्ण
निर्णय रविवार को बेअदबी के मामलों में पंजाब सरकार द्वारा बनाए गए नए
कानून पर चर्चा के लिए बुलाई गई एक विशेष बैठक के दौरान लिया गया। इस बैठक
में सिख बुद्धिजीवियों, धार्मिक विद्वानों और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक
कमेटी (एसजीपीसी) के सदस्यों ने हिस्सा लिया। जत्थेदार ने निर्देश दिया है
कि कुलतार सिंह संधवां 8 मई की सुबह 11 बजे अकाल तख्त साहिब में पेश होकर अपना
स्पष्टीकरण दें।
जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने स्पष्ट तौर पर कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब से
संबंधित किसी भी तरह के निर्णय के लिए अकाल तख्त साहिब की पूर्व स्वीकृति
लेना अनिवार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘जगत जोत एक्ट’ में संशोधन करते
समय पंजाब सरकार ने न तो अकाल तख्त साहिब को विश्वास में लिया और न ही एसजीपीसी
से कोई मशविरा किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक परंपराओं से जुड़े मामलों में
बिना विचार-विमर्श के कानून थोपना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अकाल तख्त के इस रुख पर कड़ी प्रतिक्रिया
व्यक्त की है। भगवंत मान का कहना है कि सरकार ने बेअदबी जैसे गंभीर
मामलों को रोकने के लिए कानून बनाया है, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए था।
उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि एसजीपीसी पर एक विशेष परिवार का कब्जा है और
उसके अध्यक्ष खुद को सुखबीर बादल का सिपाही बताते हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप
लगाया कि एसजीपीसी को राजनीतिक स्वार्थ के लिए दबाकर रखा गया है।
बैठक के दौरान जत्थेदार ने यह भी स्पष्ट किया कि हालांकि पंथ बेअदबी के दोषियों को
कठोरतम सजा दिलाने के पक्ष में है, लेकिन कानून के कुछ प्रावधानों पर गहरी आपत्ति
है। विशेष रूप से धार्मिक जानकारियों को सार्वजनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डालने के
फैसले को श्रद्धालुओं की सुरक्षा और निजता के लिए खतरा बताया गया। इसके साथ ही,
बैठक में साल 2015 से लंबित बेअदबी के मामलों में हो रही देरी पर भी चिंता जताई गई।
जत्थेदार ने कहा कि कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन मुख्य आरोपियों तक अब भी कानून के
हाथ नहीं पहुंच पाए हैं। मौड़ मंडी बम कांड के पीड़ितों को न्याय न मिलने और सजा
पूरी कर चुके ‘बंदी सिखों’ की रिहाई न होने पर भी सवाल उठाए गए।
बैठक में बलवंत सिंह राजोआणा के मामले में भी समान मापदंड अपनाने की पुरजोर मांग की
गई। जत्थेदार ने केंद्र सरकार को याद दिलाया कि 2019 में राजोआणा की फांसी की सजा
को उम्रकैद में बदलने का जो आश्वासन दिया गया था, उसे अभी तक पूरा नहीं किया
गया है। उन्होंने कहा कि सिख पंथ आज भी जगतार सिंह हवारा और दविंदरपाल सिंह
भुल्लर समेत उन सभी सिखों के साथ मजबूती से खड़ा है जो लंबे समय से जेलों में
बंद हैं। इस बैठक में बुढ्ढा दल, तरना दल, दमदमी टकसाल, निर्मले और उदासी
संप्रदाय समेत विभिन्न धार्मिक संस्थाओं ने एकजुटता दिखाई। जत्थेदार ने
चेतावनी दी है कि बिना पंथक सहमति के गुरु साहिब से जुड़े विषयों पर किसी भी सरकारी
हस्तक्षेप या कानून को लागू नहीं होने दिया जाएगा।
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