नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा को एक
महत्वपूर्ण कानूनी राहत प्रदान की है। सुप्रीम कोर्ट ने असम पुलिस द्वारा
दर्ज की गई एक एफआईआर के मामले में पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका को स्वीकार कर
लिया है। इस मामले में अदालत ने गुरुवार को विस्तृत सुनवाई के बाद अपना फैसला
सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब जारी कर दिया गया है। अदालत के इस निर्णय
से पवन खेड़ा को बड़ी राहत मिली है और उनकी संभावित गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लग गई
है।
यह पूरा कानूनी विवाद एक बयान से शुरू हुआ था, जिसके बाद असम में पवन खेड़ा के
खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई थी। यह एफआईआर असम के
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा की शिकायत पर
दर्ज की गई थी। रिनिकी भुइयां सरमा ने अपनी शिकायत में पवन खेड़ा पर यह आरोप
लगाया था कि उन्होंने उनके बारे में सार्वजनिक रूप से भ्रामक और गलत जानकारी
साझा की है।
शिकायत में मुख्य रूप से उस दावे का जिक्र किया गया था, जिसमें पवन खेड़ा ने कथित
तौर पर यह कहा था कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास एक से अधिक पासपोर्ट मौजूद हैं।
इस दावे को आधार बनाकर रिनिकी भुइयां सरमा ने पुलिस में शिकायत की, जिसे संज्ञान
में लेते हुए असम पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। इस मामले में
गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए पवन खेड़ा ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा
खटखटाया था और अग्रिम जमानत की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान पवन खेड़ा की ओर से पेश हुए कानूनी पक्ष ने
अपनी दलीलें रखीं और गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग की। दूसरी ओर, शिकायतकर्ता
पक्ष की ओर से इन आरोपों को गंभीर बताते हुए अपना पक्ष रखा गया था। अदालत
ने गुरुवार को दोनों पक्षों के तर्कों को गंभीरता से सुनने और मामले के विभिन्न
पहलुओं का अवलोकन करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
सर्वोच्च न्यायालय के इस ताजा आदेश के बाद अब असम पुलिस इस विशेष मामले में पवन
खेड़ा को गिरफ्तार नहीं कर पाएगी। यह राहत ऐसे समय में आई है जब इस मुद्दे
को लेकर राजनीतिक और कानूनी गलियारों में काफी चर्चा हो रही थी। रिनिकी भुइयां
सरमा द्वारा दर्ज कराई गई इस एफआईआर ने काफी हलचल पैदा की थी, लेकिन अब पवन
खेड़ा को कानूनी प्रक्रियाओं का सामना करने के लिए आवश्यक सुरक्षा कवच मिल गया
है। अब इस मामले की आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई बिना गिरफ्तारी के भय के जारी
रहेगी।
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