नई दिल्ली। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को ईरान के साथ चल रहे युद्ध के
मुद्दे पर अमेरिकी कांग्रेस में तीखे सवालों और भारी विरोध का सामना करना
पड़ा। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा बिना कांग्रेस की वैधानिक मंजूरी के शुरू
किए गए इस सैन्य संघर्ष को लेकर डेमोक्रेट सांसदों ने सरकार की रणनीति पर कड़े
प्रहार किए। सुनवाई के दौरान न केवल युद्ध की बढ़ती लागत पर चिंता जताई गई, बल्कि
इसके मानवीय और आर्थिक पहलुओं पर भी गहन चर्चा हुई।
पेंटागन द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस युद्ध में अब तक अमेरिका के
लगभग 25 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। खर्च के इसी बढ़ते ग्राफ के बीच सरकार
ने आगामी 2027 के लिए रक्षा बजट को बढ़ाकर 1.5 ट्रिलियन डॉलर करने का नया
प्रस्ताव रखा है। छह घंटे तक चली इस मैराथन सुनवाई में डेमोक्रेट
नेताओं ने युद्ध के कारण हथियारों के भंडार में आई कमी और एक स्कूल पर हुई
बमबारी में बच्चों की मौत जैसे संवेदनशील मुद्दों को उठाते हुए रक्षा
मंत्री को कठघरे में खड़ा किया।
सांसद जॉन गरामेंडी ने इस युद्ध को अमेरिका की एक बड़ी रणनीतिक भूल बताते हुए आरोप
लगाया कि सरकार ने युद्ध के वास्तविक कारणों को लेकर देश की जनता को गुमराह किया
है। इन आरोपों का जवाब देते हुए पीट हेगसेथ ने कहा कि विपक्ष की आलोचना पूरी तरह
से राजनीतिक है और इस तरह के बयान राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
हेगसेथ ने यह भी दावा किया कि साल 2025 में किए गए अमेरिकी हमलों में ईरान
के परमाणु ठिकाने नष्ट कर दिए गए थे, हालांकि ईरान ने अपनी परमाणु क्षमताओं को
बढ़ाने का प्रयास बंद नहीं किया है। इस पर एडम स्मिथ जैसे सांसदों ने सवाल
उठाया कि अगर मुख्य ठिकाने नष्ट हो चुके थे, तो इस युद्ध को और लंबा खींचने
का क्या औचित्य है।
युद्ध का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ा है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ
होर्मुज को बंद किए जाने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया
है, जिससे अमेरिका के भीतर ईंधन के दाम बढ़ गए हैं। इसके जवाब में अमेरिका ने
ईरान की समुद्री नाकेबंदी कर दी है और मध्य पूर्व के क्षेत्र में अपने तीन बड़े
विमानवाहक पोत तैनात कर दिए हैं। डेमोक्रेट्स ने इसे आम अमेरिकी नागरिकों पर आर्थिक
बोझ बढ़ाने वाला कदम बताया।
इसके अलावा, सेना के भीतर बड़े स्तर पर किए गए बदलावों और शीर्ष अधिकारियों को हटाए
जाने पर भी रक्षा मंत्री से जवाब मांगा गया। हेगसेथ ने इन फैसलों का बचाव करते हुए
कहा कि सेना में ‘वॉरियर कल्चर’ यानी योद्धा संस्कृति को पुनर्जीवित करने और नई
नेतृत्व व्यवस्था स्थापित करने के लिए यह आवश्यक था। फिलहाल, अमेरिका और ईरान
के बीच गतिरोध बरकरार है, क्योंकि ट्रंप ने ईरान के उस शांति प्रस्ताव को सिरे
से खारिज कर दिया है जिसमें प्रतिबंध हटाने के बदले समुद्री रास्ता खोलने की
पेशकश की गई थी।
Pls read:US: अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में परमाणु मुद्दा बना बड़ी बाधा