Uttarpradesh: यूपी विधानमंडल के विशेष सत्र में महिला आरक्षण के मुद्दे पर भारी घमासान और विपक्षी नेताओं का जोरदार प्रदर्शन – The Hill News

Uttarpradesh: यूपी विधानमंडल के विशेष सत्र में महिला आरक्षण के मुद्दे पर भारी घमासान और विपक्षी नेताओं का जोरदार प्रदर्शन

नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानमंडल का विशेष सत्र गुरुवार को सुबह 11 बजे से
ही हंगामे की भेंट चढ़ गया। सत्र की शुरुआत के साथ ही सदन का माहौल बेहद
तनावपूर्ण हो गया और सत्ता पक्ष व विपक्ष के सदस्य एक-दूसरे के
आमने-सामने आ गए। इस पूरे विवाद और गहमागहमी के केंद्र में ‘महिला आरक्षण
बिल’ रहा, जिसे लेकर विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सदन के भीतर
और बाहर दोनों ही जगहों पर विपक्षी सदस्यों ने जमकर नारेबाजी की और सरकार की
नीतियों पर सवाल खड़े किए।

विधानसभा परिसर के बाहर का दृश्य भी काफी गहमागहमी भरा रहा। समाजवादी पार्टी के
तमाम नेता और कार्यकर्ता अपने हाथों में महिला आरक्षण बिल से संबंधित
स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर पहुंचे थे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के
खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए आरोप लगाया कि महिलाओं के अधिकारों को लेकर
सरकार केवल दिखावा कर रही है। नारेबाजी के कारण विधानसभा मार्ग पर भी काफी
शोर-शराबा देखा गया, जिससे सत्र की शुरुआत ही काफी हंगामेदार रही।

विपक्ष की ओर से मोर्चा संभालते हुए नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने सरकार पर
गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि विपक्ष का यह विरोध
पूरी तरह जायज है क्योंकि सरकार की नीयत महिला आरक्षण को वास्तविक रूप में
लागू करने की नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिला आरक्षण विधेयक पहले ही
पारित हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद सरकार इसे धरातल पर उतारने में लगातार देरी कर
रही है। माता प्रसाद पांडेय के अनुसार, यह सरकार की निष्क्रियता और महिलाओं के
प्रति उनकी उदासीनता को दर्शाता है।

इस राजनीतिक घमासान के बीच समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सरकार को
घेरा। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला
और पार्टी की मानसिकता पर सवाल उठाए। अखिलेश यादव ने लिखा कि भाजपा के नेता
सार्वजनिक मंचों पर भले ही महिला मुद्दों को प्राथमिकता देने का
दावा करते हों, लेकिन सच्चाई यह है कि उनकी सोच पूरी तरह महिला विरोधी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के लिए महिलाएं केवल एक राजनीतिक ‘मुद्दा’ हैं,
न कि उनके कल्याण की कोई वास्तविक योजना।

विशेष सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। विपक्ष का आरोप था कि जब
विधेयक पारित हो चुका है, तो उसे लागू करने में जानबूझकर अड़चनें पैदा की जा रही
हैं। वहीं सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताया। पूरे दिन सदन की
कार्यवाही में काम कम और शोर-शराबा अधिक रहा, जिससे यह स्पष्ट हो
गया कि आने वाले समय में महिला आरक्षण का मुद्दा राज्य की राजनीति में और गरमाने
वाला है। विपक्ष ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे
अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

 

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