दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एएनआई नेशनल सिक्योरिटी समिट 2.0 में देश
की सैन्य शक्ति और आतंकवाद के खिलाफ भारत के कड़े रुख पर महत्वपूर्ण विचार साझा
किए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को किसी कमजोरी या
दबाव के कारण नहीं, बल्कि अपनी स्वेच्छा और शर्तों पर रोका था। राजनाथ सिंह
ने जोर देकर कहा कि भारत पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ लंबी लड़ाई लड़ने के लिए हर
तरह से तैयार था और उसकी सैन्य क्षमता पहले के मुकाबले कहीं अधिक मजबूत हुई है।
पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर घेरते हुए रक्षा मंत्री ने उसे अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद
का मुख्य केंद्र करार दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद की समस्या केवल सीमा तक
सीमित नहीं है, बल्कि इसे पूरी तरह जड़ से मिटाना आवश्यक है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति ने यह स्पष्ट कर दिया है
कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि साझा करते हुए राजनाथ सिंह ने बताया कि यह सैन्य
कार्रवाई पहलगाम में हुए आतंकी हमले के प्रतिशोध में की गई थी। इस
हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी, जिसके जवाब में 7 मई 2025 को भारतीय
सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में सक्रिय आतंकी ठिकानों को
निशाना बनाना शुरू किया। इस ऑपरेशन के दौरान लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और
हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों के 9 बड़े ठिकानों को नेस्तनाबूद कर
दिया गया, जिसमें 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए।
रक्षा मंत्री ने बताया कि संघर्ष के दौरान भारत को परमाणु हमले की धमकी देकर डराने
की कोशिश भी की गई थी, लेकिन भारत ने ऐसी धमकियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
उन्होंने कहा कि भारत किसी भी बाहरी दबाव में आने वाला देश नहीं है। भारतीय सेना
ने केवल उन्हीं स्थानों पर प्रहार किया जहां से आतंकी गतिविधियां संचालित हो रही
थीं। पाकिस्तान द्वारा किए गए ड्रोन हमलों और गोलाबारी का भारतीय सेना ने डटकर
मुकाबला किया, जिसके बाद चार दिनों के संघर्ष के अंत में 10 मई को युद्धविराम
पर सहमति बनी।
आतंकवाद के विरुद्ध रणनीति पर बात करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि इसके तीन प्रमुख
पहलू हैं- ऑपरेशनल, वैचारिक और राजनीतिक। जब तक इन तीनों स्तरों पर एक साथ प्रहार
नहीं होगा, तब तक इस समस्या का अंत संभव नहीं है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि
आज भारत की पहचान दुनिया भर में आईटी (सूचना प्रौद्योगिकी) के कारण है, जबकि
पाकिस्तान को लोग केवल ‘इंटरनेशनल टेररिज्म’ के कारण जानते हैं। भारत अब
केवल बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि ठोस कार्रवाई करने में विश्वास रखता है।