चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने आगामी एक मई को मजदूर दिवस के अवसर पर विधानसभा का एक विशेष
सत्र बुलाने का निर्णय लिया है। कैबिनेट की हालिया बैठक में इस सत्र के आयोजन पर
मुहर लगाई गई। आधिकारिक तौर पर इस सत्र का मुख्य उद्देश्य मई दिवस के शहीदों
को श्रद्धांजलि अर्पित करना और सदन में उनसे जुड़ा एक विशेष प्रस्ताव पेश करना है।
हालांकि, राज्य के मौजूदा सियासी हालात को देखते हुए यह सत्र केवल औपचारिकता तक
सीमित रहता नहीं दिख रहा है। माना जा रहा है कि इस सत्र के बहाने राज्य का
राजनीतिक तापमान काफी बढ़ सकता है।
सत्र के दौरान सरकार का मुख्य एजेंडा मजदूरों के हितों और उनकी समस्याओं पर
केंद्रित रहेगा। इसमें मनरेगा और उसके ढांचे में हो रहे बदलावों के
कारण श्रमिक वर्ग पर पड़ने वाले प्रभावों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।
इसके अलावा, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजदूरों के सामने खड़ी वर्तमान
चुनौतियों को भी एजेंडे में शामिल किया गया है। सूत्रों के अनुसार, इस विशेष सत्र
में विभिन्न मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जा सकता है, ताकि
श्रमिक वर्ग की आवाज़ को सीधे सदन के पटल पर रखा जा सके।
इस विशेष सत्र का सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित पहलू इसका राजनीतिक समीकरण रहने वाला
है। हाल ही में आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सदस्यों के पार्टी छोड़कर भाजपा
में शामिल होने के घटनाक्रम ने पंजाब की राजनीति में खलबली मचा दी है। इस घटना के
बाद से ही आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच तल्खी चरम पर है। माना जा रहा है कि
भगवंत मान सरकार इस सत्र का उपयोग भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए
करेगी। सदन के भीतर भाजपा की कथित नीतियों और इस राजनीतिक घटनाक्रम के खिलाफ
एक जोरदार बहस और निंदा प्रस्ताव लाए जाने की प्रबल संभावना है।
यह पहली बार नहीं है जब पंजाब सरकार ने किसी राजनीतिक मुद्दे पर विशेष सत्र का
सहारा लिया हो। इससे पहले सितंबर 2022 में भी ‘ऑपरेशन लोटस’ के आरोपों के
बीच सरकार ने विशेष सत्र बुलाने की कोशिश की थी। उस समय सरकार और राज्यपाल के बीच
कड़ा टकराव देखने को मिला था। अंततः 27 सितंबर को सत्र आयोजित किया गया और सरकार
ने अपना विश्वास प्रस्ताव पारित किया था। उस दौरान भी आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर
विधायकों की खरीद-फरोख्त की कोशिश करने के गंभीर आरोप लगाए थे और मोहाली में
मामला भी दर्ज कराया गया था।
अब एक बार फिर राज्यसभा सांसदों के पाला बदलने के बाद आम आदमी पार्टी भाजपा को
घेरने की पूरी तैयारी में है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजदूर दिवस के
बहाने बुलाया गया यह सत्र वास्तव में एक बड़ा राजनीतिक मंच बनेगा, जहाँ सत्ता
पक्ष भाजपा पर तीखे हमले करेगा। ऐसे में सत्र के दौरान सदन के भीतर भारी
शोर-शराबे और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलना तय माना जा रहा है।