नई दिल्ली। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार
में खलबली मचा दी है। इस संघर्ष के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (होर्मुज जलडमरूमध्य)
से होने वाली तेल और गैस की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। होर्मुज को दुनिया
का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग माना जाता है और वर्तमान परिस्थितियों ने
मिडिल ईस्ट के देशों के लिए निर्यात के सीमित विकल्पों की बड़ी चुनौती पेश कर दी है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने इस स्थिति को अब तक का सबसे बड़ा आपूर्ति संकट करार
दिया है। एजेंसी के अनुसार, यह वर्तमान संकट 1970 के दशक के ऐतिहासिक तेल संकट
और रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान हुई गैस आपूर्ति बाधा से भी कहीं अधिक गंभीर है।
इस खतरे को देखते हुए खाड़ी देश अब होर्मुज को बायपास करने के लिए पुराने और नए
वैकल्पिक रास्तों पर अपनी निर्भरता बढ़ाने की कोशिशों में जुट गए हैं।
मौजूदा विकल्पों में सऊदी अरब की 1200 किलोमीटर लंबी ‘ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन’ सबसे
प्रमुख है। इसकी क्षमता प्रतिदिन 70 लाख बैरल तेल परिवहन की है, हालांकि
वर्तमान में इसके जरिए केवल 45 लाख बैरल तेल का ही निर्यात हो पा रहा है।
यह तेल यनबू बंदरगाह तक पहुँचता है, जहाँ से इसे आसानी से एशिया और यूरोप के
बाजारों में भेजा जाता है। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात की 360 किलोमीटर
लंबी हबशान-फुजैराह पाइपलाइन भी एक महत्वपूर्ण विकल्प है। यह पाइपलाइन होर्मुज के
बाहर स्थित फुजैराह बंदरगाह तक तेल पहुंचाती है, लेकिन हालिया ड्रोन हमलों ने
इसकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
इराक और तुर्की के बीच की किर्कुक-जेहान पाइपलाइन को भी ढाई साल के लंबे अंतराल के
बाद दोबारा शुरू किया गया है। वर्तमान में इसके माध्यम से 1.7 लाख बैरल तेल
रोजाना भेजा जा रहा है, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 2.5 लाख बैरल करने की
योजना है। खुद ईरान भी ‘गोरेह-जास्क पाइपलाइन’ के रूप में एक विकल्प तैयार कर
रहा है, जिसकी क्षमता 10 लाख बैरल प्रतिदिन है। हालांकि जास्क टर्मिनल अभी पूरी तरह
तैयार नहीं है, लेकिन वर्ष 2024 में यहाँ से ट्रायल शिपमेंट किया जा चुका है।
भविष्य की योजनाओं के तहत इराक अब ओमान के दूक्म बंदरगाह तक नई पाइपलाइन बनाने पर
विचार कर रहा है। साथ ही इराक से जॉर्डन के अकाबा बंदरगाह तक भी एक पाइपलाइन का
प्रस्ताव लंबे समय से लंबित है, जिसकी क्षमता 10 लाख बैरल प्रतिदिन हो सकती है।
हालांकि, भारी लागत और सुरक्षा कारणों से ये प्रोजेक्ट फिलहाल अटके हुए
हैं। एक विशाल वैकल्पिक विचार खाड़ी से ओमान सागर तक एक नई नहर बनाने का भी
है, लेकिन हजर पर्वतमाला को काटकर स्वेज नहर जैसी संरचना तैयार करना आर्थिक और
भौगोलिक रूप से अत्यंत चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
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