देहरादून। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सदस्य डॉक्टर दिनेश कुमार असवाल ने उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन की तैयारियों का जायजा लेते हुए स्पष्ट किया कि विकास और आपदा न्यूनीकरण के बीच संतुलन होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास की आवश्यकता है, लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी निर्माण कार्य भविष्य में किसी नई आपदा का आधार न बने। मंगलवार को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने राज्य के सभी 13 जिलों की तैयारियों की समीक्षा की और ‘जीरो डेथ’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आपदा जोखिम को कम करने पर जोर दिया।
डॉक्टर असवाल ने उत्तराखंड में भूस्खलन की पूर्व चेतावनी प्रणाली (Landslide Early Warning System) विकसित करने की आवश्यकता बताई और इसके लिए एनडीएमए की ओर से पूर्ण तकनीकी सहयोग का भरोसा दिया। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने जिलों में संचार विहीन क्षेत्रों (शैडो एरिया) की पहचान करें ताकि वहां मोबाइल कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा सके। इसके लिए एनडीएमए टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश जारी करेगा। सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुरोध पर उन्होंने नदियों के चैनलाइजेशन और ड्रेजिंग कार्यों के लिए एसडीआरएफ फंड में छूट दिलाने का भी आश्वासन दिया।
सामुदायिक सशक्तिकरण को आपदा प्रबंधन की रीढ़ बताते हुए डॉक्टर असवाल ने ‘युवा आपदा मित्र योजना’ के तहत अधिक से अधिक लोगों को प्रशिक्षित करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य के सभी सरकारी और निजी संस्थानों, जैसे स्कूल, अस्पताल, मॉल और स्टेडियम के लिए आपदा प्रबंधन योजना बनाना अनिवार्य किया जाए। साथ ही, जिलाधिकारियों को हर महीने सेना और अर्धसैनिक बलों के साथ समन्वय बैठक करने का निर्देश दिया ताकि संकट के समय त्वरित कार्रवाई की जा सके।
वनाग्नि की समस्या पर चर्चा करते हुए उन्होंने पिरूल (चीड़ की पत्तियों) को एक उपयोगी संसाधन के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि पिरूल से ईंधन के ब्रिकेट बनाने की परियोजनाओं के लिए एनडीएमए बड़े स्तर पर फंडिंग करने को तैयार है। इसके लिए उन्होंने पिरूल एकत्र करने हेतु रोबोटिक्स जैसी आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर दिया। इसके अलावा, उन्होंने अत्यधिक संवेदनशील गांवों के चरणबद्ध विस्थापन के लिए हर जिले में एक ‘मॉडल सुरक्षित गांव’ बसाने का सुझाव दिया, जो आपदा मानकों के अनुकूल हो।
बैठक में भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए ‘डिजिटल ट्विन’ जैसी अत्याधुनिक तकनीक अपनाने और आपदा प्रबंधन में स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने की बात भी कही गई। पहाड़ों में निर्माण कार्यों के लिए बिल्डिंग बायलॉज में आवश्यक संशोधन और उनके सख्त पालन की आवश्यकता जताई गई। इस अवसर पर खाद्य सचिव आनंद स्वरूप, डीआईजी राजकुमार नेगी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।