नई दिल्ली। मणिपुर के इंफाल पूर्वी जिले में हाल ही में हुए विरोध मार्च के दौरान भड़की हिंसा को लेकर पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। सुरक्षा बलों पर हमला करने और शांति व्यवस्था भंग करने के आरोप में पुलिस ने अब तक 21 लोगों को हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई 18 अप्रैल को आयोजित एक रैली के दौरान हुई हिंसक झड़पों के मद्देनजर की गई है, जिसमें प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखा टकराव देखने को मिला था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह रैली एक स्थानीय बम हमले की घटना के विरोध में आयोजित की गई थी, जिसमें दो मासूम बच्चों की दुखद मृत्यु हो गई थी। हालांकि, शांतिपूर्ण विरोध के उद्देश्य से शुरू हुई यह रैली जल्द ही हिंसक हो गई। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए पेट्रोल बम, गुलेल और भारी पत्थरों का सहारा लिया। इस हमले में सुरक्षा बलों की गाड़ियों को काफी नुकसान पहुंचा और सीआरपीएफ की 232 बटालियन के तीन जवान गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका अस्पताल में उपचार चल रहा है।
हिंसा और अशांति के इस माहौल के बीच मणिपुर सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए भी कड़े कदम उठाए हैं। घाटी के जिलों में महिला संगठनों द्वारा पांच दिवसीय बंद का आह्वान किया गया है, जिसके कारण सरकारी कामकाज पर बुरा असर पड़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए मुख्य सचिव ने एक आधिकारिक आदेश जारी किया है। आदेश में सभी विभागाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जो भी कर्मचारी बिना किसी पूर्व अनुमति या ठोस कारण के कार्यालय से अनुपस्थित पाए जाते हैं, उनके विरुद्ध तत्काल विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाए।
राज्य सरकार का मानना है कि बंद और प्रदर्शनों की आड़ में आवश्यक सेवाओं और सरकारी कार्यों में बाधा डालना स्वीकार्य नहीं है। पुलिस प्रशासन भी लगातार संवेदनशील इलाकों में गश्त कर रहा है ताकि हिंसा की पुनरावृत्ति न हो सके। गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ जारी है और पुलिस सीसीटीवी फुटेज व अन्य सबूतों के आधार पर अन्य उपद्रवियों की पहचान करने की कोशिश कर रही है। सरकार ने आम नागरिकों से शांति बनाए रखने और कानून-व्यवस्था का पालन करने की अपील की है। आने वाले दिनों में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा किया जा सकता है।