देहरादून 15 अप्रैल, 2026 (सू. ब्यूरो)
राज्य में वनाग्नि की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में उच्चाधिकारियों के साथ अहम बैठक की और कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि वनाग्नि से जुड़ी सभी समितियों और संबंधित पक्षों की बैठकें जनवरी तक अनिवार्य रूप से पूरी कर ली जाएं, ताकि फायर सीजन शुरू होने से पहले सभी तैयारियां सुनिश्चित की जा सकें।
बैठक में फायर हाइड्रेंट्स के लिए समर्पित प्रेशर पाइपलाइन व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया। इसके लिए पेयजल विभाग को शीघ्र प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही वन विभाग को अभियान चलाकर वनाग्नि से संबंधित व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने और उपकरणों व वाहनों के रखरखाव को दुरुस्त रखने को कहा गया। लीसा डिपो में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
मुख्य सचिव ने वन, मौसम और वन सर्वेक्षण संस्थानों को मिलकर वनाग्नि के लिए एक प्रिडिक्शन मॉडल तैयार करने के निर्देश दिए। इस मॉडल के माध्यम से आग लगने की संभावनाओं का पहले से आकलन किया जा सकेगा, जिससे समय रहते रोकथाम के उपाय किए जा सकेंगे और नुकसान को कम किया जा सकेगा।
इसके अलावा जंगलों में पिरूल के प्रभावी निस्तारण और पिरुल ब्रिकेट के उत्पादन को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया। इसे वैकल्पिक ईंधन के रूप में विकसित करने के लिए अधिक यूनिट स्थापित करने की बात कही गई। इससे न केवल वनाग्नि पर नियंत्रण में मदद मिलेगी, बल्कि स्वयं सहायता समूहों की आय बढ़ाने और कार्बन क्रेडिट से जुड़ने के अवसर भी मिलेंगे।
बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और जिलाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।
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