Uttarakhand: लिपुलेख दर्रे से भारत चीन सीमा व्यापार पांच साल बाद फिर होगा शुरू

पिथौरागढ़। कोरोना वैश्विक महामारी के कारण लंबे समय से बंद पड़ा भारत और चीन के बीच का स्थलीय व्यापार इस वर्ष फिर से बहाल होने जा रहा है। आखिरी बार साल 2019 में सीमांत क्षेत्र के व्यापारी तिब्बत की तकलाकोट मंडी तक गए थे, लेकिन 2020 से इस व्यापार पर पाबंदी लग गई थी। अब दोनों देशों के बीच हुई वार्ता के सकारात्मक परिणामों के बाद केंद्र सरकार ने पिथौरागढ़ जिले के लिपुलेख दर्रे के माध्यम से व्यापार शुरू करने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि यह व्यापारिक गतिविधियां आगामी 1 जून से विधिवत रूप से प्रारंभ हो जाएंगी।

भारत और चीन की सीमा को जोड़ने वाले लिपुलेख दर्रे का व्यापारिक इतिहास काफी पुराना और महत्वपूर्ण है। साल 1962 में दोनों देशों के बीच हुए युद्ध के बाद इस मार्ग से व्यापार रोक दिया गया था, जिसे लंबी कूटनीतिक कोशिशों के बाद 1991 में दोबारा शुरू किया गया था। हालांकि, कोरोना काल के दौरान व्यापार के साथ-साथ प्रसिद्ध कैलाश मानसरोवर यात्रा भी स्थगित कर दी गई थी। साल 2025 में कैलाश मानसरोवर यात्रा तो दोबारा शुरू हो गई थी, लेकिन व्यापार को लेकर तब दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन पाई थी।

व्यापार बहाली की खबरों के बीच पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने बुधवार को कस्टम, आईटीबीपी, पुलिस, परिवहन और स्वास्थ्य सहित विभिन्न संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की और तैयारियां तेज करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि व्यापार शुरू करने के लिए सभी आवश्यक प्रबंध समय रहते पूरे कर लिए जाएं। जिलाधिकारी ने बताया कि इस वर्ष व्यापार में शामिल होने वाले इच्छुक भारतीय व्यापारियों की सूची तैयार कर जल्द ही केंद्र सरकार को भेज दी जाएगी।

सांख्यिकीय आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2019 में कुल 265 व्यापारियों को व्यापार के लिए परमिट जारी किए गए थे। उस समय कुल 3.15 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था, जिसमें 1.9 करोड़ रुपये का सामान आयात किया गया था और 1.25 करोड़ रुपये की सामग्री निर्यात की गई थी। इस वर्ष व्यापारियों की संख्या बढ़कर 300 के पार पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है।

भारत-चीन व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन सिंह रौंकली के अनुसार, भारतीय व्यापारी मुख्य रूप से गुड़, मिश्री, तंबाकू (सुर्ती), सौंदर्य प्रसाधन की सामग्री और बर्तन लेकर चीन की तकलाकोट मंडी जाते हैं। वहां से वापसी में वे उच्च गुणवत्ता वाले कंबल, जैकेट, शाल, याक के बाल और जूते जैसे उत्पाद लेकर भारत लौटते हैं। भारतीय व्यापारिक मंडी गुंजी में स्थापित की जाती है, जहां भारतीय स्टेट बैंक की शाखा और कस्टम कार्यालय की विशेष व्यवस्था की जाती है ताकि व्यापारियों को मुद्रा विनिमय और कागजी कार्रवाई में आसानी हो। जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने पुष्टि की है कि एक जून से व्यापार शुरू करने की पूरी उम्मीद है और प्रशासन इसके लिए मुस्तैद है।

 

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