लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति और विकास के इतिहास में बुधवार का दिन एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने अपने शासन के नौ वर्ष सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। इस विशेष अवसर पर राजधानी लखनऊ के लोक भवन में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें सरकार की उपलब्धियों पर आधारित पुस्तक ‘नवनिर्माण के नौ वर्ष’ का विमोचन किया गया। इस गौरवशाली क्षण के साक्षी उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और वित्त व संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना सहित शासन के कई वरिष्ठ अधिकारी बने। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश की 25 करोड़ जनता को इन नौ वर्षों की यात्रा में सहभागी बनने के लिए बधाई दी और राज्य के भविष्य के लिए नौ लाख करोड़ रुपये से अधिक के भारी-भरकम बजट की घोषणा भी की।
ऐतिहासिक बजट और समावेशी विकास का संकल्प
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार के नौ साल पूरे होने के उपलक्ष्य में पहली अप्रैल से लागू होने वाले नए बजट में प्रदेश के चहुंमुखी विकास के लिए नौ लाख 12 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना द्वारा तैयार किया गया यह बजट उत्तर प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा और प्रभावी बजट माना जा रहा है। मुख्यमंत्री का मानना है कि यह विशाल धनराशि राज्य के समग्र और संतुलित विकास को एक नई और तीव्र गति प्रदान करेगी।
इस बजट का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना, बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) को वैश्विक स्तर का बनाना और युवाओं के लिए रोजगार के नए एवं स्थायी अवसर सृजित करना है। योगी आदित्यनाथ ने जोर देकर कहा कि आज का उत्तर प्रदेश सुरक्षा, सुशासन और विकास के ऐसे मानक स्थापित कर रहा है, जो पूरे देश के लिए एक उदाहरण बन गए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इन नौ वर्षों में जो परिवर्तन की नींव रखी गई है, उसका व्यापक स्वरूप आने वाले समय में और भी स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
अन्नदाताओं के सम्मान और कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार
अपनी सरकार की प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में सत्ता संभालने के तुरंत बाद उनका पहला और सबसे बड़ा निर्णय किसानों के हित में था। सरकार ने अपने पहले ही कैबिनेट में अन्नदाताओं की ऋण माफी का ऐतिहासिक कदम उठाया था। उन्होंने बताया कि उस समय शुरू हुई किसानों की सेवा की यात्रा आज ‘किसान सम्मान निधि’ तक पहुँच चुकी है। इन नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने कृषि के क्षेत्र में जो प्रगति की है, वह अभूतपूर्व है।
आंकड़ों के जरिए अपनी बात रखते हुए उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में कृषि विकास दर साढे आठ प्रतिशत से बढ़कर अब 18 प्रतिशत तक पहुँच गई है। आज के समय में उत्तर प्रदेश देश का सबसे तेज गति से कृषि विकास करने वाला राज्य बन चुका है। मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ कहा कि अब राज्य का अन्नदाता किसान आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम नहीं उठाता, क्योंकि उसे सरकार का पूर्ण सहयोग मिल रहा है।
गन्ना किसानों का रिकॉर्ड भुगतान
कृषि सुधारों की चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से गन्ना किसानों की स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों और अपनी सरकार की तुलना करते हुए बताया कि 2012 से 2017 के बीच गन्ना किसानों को कुल 95 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। इसके विपरीत, 2017 से अब तक योगी सरकार ने गन्ना किसानों को तीन लाख 16 हजार 800 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड भुगतान सुनिश्चित किया है।
मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी की सरकारों ने जिस किसान को केवल कर्ज के जाल में फंसाया था, उनकी सरकार ने उसी किसान को एक सक्षम उत्पादक बनाया है। सरकार की योजनाओं ने अन्नदाता को कर्जदाता की श्रेणी से निकालकर खुशहाली की ओर अग्रसर किया है। यह भारी-भरकम भुगतान इस बात का प्रमाण है कि वर्तमान सरकार की नीतियां सीधे तौर पर जमीन से जुड़े लोगों को लाभ पहुँचा रही हैं।
अंधविश्वास को चुनौती और नोएडा का विकास
समारोह के दौरान योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में वर्षों से चले आ रहे एक अंधविश्वास को तोड़ने की अपनी साहसिक पहल पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले सत्ता में रहे लोग नोएडा जाने से डरते थे। राजनीतिक गलियारों में यह मिथक फैला था कि जो भी मुख्यमंत्री नोएडा जाएगा, उसे अपनी कुर्सी गंवानी पड़ेगी।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब उन्हें मुख्यमंत्री का दायित्व मिला, तो उन्होंने इस अंधविश्वास को दरकिनार करते हुए नोएडा जाने का फैसला किया। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि प्रदेश के विकास के लिए यदि कुर्सी आज जाती है तो आज ही चली जाए, लेकिन वे नोएडा जरूर जाएंगे। उन्होंने वहां जाकर विकास की राह में आने वाले सभी बैरियर हटाए और आज नोएडा राज्य के विकास का एक प्रमुख इंजन बनकर उभरा है। उनका यह कदम दर्शाता है कि वर्तमान नेतृत्व आस्था को अंधविश्वास से ऊपर और जनहित को सत्ता मोह से बड़ा मानता है।
नौ वर्षों की यात्रा का महत्व
उल्लेखनीय है कि योगी आदित्यनाथ ने पहली बार 19 मार्च 2017 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके प्रथम कार्यकाल की सफलताओं के बाद जनता ने उन पर पुनः विश्वास जताया और 25 मार्च 2022 को उन्होंने दूसरी बार इस पद की जिम्मेदारी संभाली। बुधवार को उनकी सरकार के सफल नौ वर्ष पूरे हो गए, जिसे प्रदेश सरकार ने सतत समृद्धि और सुशासन के उत्सव के रूप में मनाया। 25 करोड़ लोगों की सामूहिक शक्ति और सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति ने उत्तर प्रदेश को ‘बीमारू राज्य’ की श्रेणी से बाहर निकालकर ‘उत्तम प्रदेश’ बनाने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ाए हैं। आने वाले वर्षों में नौ लाख करोड़ के इस नए बजट से प्रदेश के विकास की यह यात्रा और भी स्वर्णमयी होने की उम्मीद है।
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