Punjab: पंजाब विधानसभा में बेअदबी और कानून व्यवस्था पर तीखी बहस, विपक्ष ने किया सदन से वॉकआउट

चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सोमवार को सदन का माहौल उस समय गर्मा गया जब विपक्ष ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी और प्रदेश की बिगड़ती कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लिया। विपक्षी दलों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए तीखे सवाल पूछे, जिसके बाद सदन में काफी देर तक हंगामा होता रहा और अंततः विपक्षी सदस्यों ने विरोध स्वरूप सदन से वॉकआउट कर दिया।

विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) ने सत्ता में आने से पहले जनता से यह वादा किया था कि बेअदबी के दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जाएगी। उन्होंने याद दिलाया कि चुनाव से पूर्व अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान ने बरगाड़ी और बहबल कलां जैसे संवेदशनशील स्थानों पर जाकर पीड़ित परिवारों को न्याय का भरोसा दिलाया था। बाजवा ने आरोप लगाया कि सरकार को बने चार साल बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। उन्होंने विशेष रूप से एसआईटी के पूर्व सदस्य कुंवर विजय प्रताप सिंह की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए पूछा कि उस पर अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए कहा कि बेअदबी से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामले अब पंजाब से बाहर दूसरे राज्यों की अदालतों में स्थानांतरित हो गए हैं, जिससे न्याय मिलने में और अधिक देरी होने की आशंका है। बाजवा ने सरकार से मांग की कि इस मामले में गठित विशेष कमेटी की रिपोर्ट को तुरंत सदन के पटल पर रखा जाए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार केवल समय बिताने के लिए आश्वासन दे रही है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी विपक्ष ने सरकार पर गंभीर हमले किए। बाजवा ने दावा किया कि पंजाब में वर्तमान में व्यापारियों और आम नागरिकों को फिरौती के लिए लगातार धमकियाँ मिल रही हैं, जिसके कारण समाज में असुरक्षा का माहौल व्याप्त है। उन्होंने गुरदासपुर में हाल ही में हुई डकैती का उदाहरण देते हुए कहा कि जब एसएसपी के घर के नजदीक ही अपराधी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं, तो आम आदमी खुद को कैसे सुरक्षित महसूस कर सकता है।

नशे की बढ़ती समस्या पर भी सरकार को कटघरे में खड़ा किया गया। विपक्ष ने अमृतसर में एक पुलिसकर्मी के बेटे की नशे के कारण हुई मौत का दुखद प्रसंग सुनाते हुए कहा कि सरकार के तमाम दावों के बावजूद नशे का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि उन्हें जनहित के मुद्दों पर बोलने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा है। इसी नाराजगी के चलते कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के विधायक शोर-शराबा करते हुए सदन से बाहर चले गए। सरकार की ओर से हालांकि इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया गया, लेकिन इस हंगामे ने सत्र की कार्यवाही को काफी प्रभावित किया।

 

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