हरिद्वार। उत्तराखंड सरकार के सफल कार्यकाल के चार वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘जन जन की सरकार, 4 साल बेमिसाल’ कार्यक्रम का दृश्य ऐतिहासिक रहा। हरिद्वार के बैरागी कैंप में आयोजित इस भव्य समारोह में न केवल प्रदेश के विकास का उत्सव मनाया गया, बल्कि यह आयोजन आध्यात्मिक गरिमा और जनशक्ति के अद्भुत संगम का गवाह बना। कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता धर्मनगरी के प्रतिष्ठित संतों का महासमागम रही, जिन्होंने मंच पर मौजूद नेतृत्व को अपनी शुभकामनाओं से अभिसिंचित किया।
समारोह में विभिन्न अखाड़ों के महामंडलेश्वर, वरिष्ठ संत और साधु-संन्यासी बड़ी संख्या में सम्मिलित हुए। संतों के सम्मान और उनकी गरिमा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा आयोजन स्थल पर एक अलग और विशेष दीर्घा की व्यवस्था की गई थी। संतों की इस व्यापक मौजूदगी ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रंग में सराबोर कर दिया। जैसे ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभा स्थल पर प्रवेश किया, संतों ने वैदिक परंपरा के अनुरूप उन्हें अपना आशीर्वाद दिया। संत समाज ने राज्य की निरंतर प्रगति, सुख-समृद्धि और जनकल्याण के संकल्पों के लिए सरकार की सराहना की और अपने मंगल वचनों से उपस्थित जनता को भी प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान हरिद्वार के बैरागी कैंप में जनसैलाब उमड़ पड़ा था। उत्तराखंड के कोने-कोने से लोग इस गौरवशाली क्षण का हिस्सा बनने के लिए सुबह से ही जुटने लगे थे। आयोजन में विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं की भारी भागीदारी ने सरकार की लोकप्रिय नीतियों के प्रति जनता के भरोसे को प्रदर्शित किया। जैसे ही अमित शाह और पुष्कर सिंह धामी मंच पर पहुँचे, पूरा परिसर ‘भारत माता की जय’ और स्वागत के नारों से गूँज उठा। उत्साहित जनता ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ अपने नेताओं का अभिवादन किया।
इतनी विशाल भीड़ होने के बावजूद पूरा कार्यक्रम अत्यंत अनुशासित ढंग से संपन्न हुआ। सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजामों के बीच लोगों ने धैर्यपूर्वक अपने नेताओं के विचारों को सुना। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन की शुरुआत जनसमुदाय से जोश के साथ ‘भारत माता की जय’ का नारा लगवाकर की। इस उद्घोष से पूरे क्षेत्र में देशभक्ति की लहर दौड़ गई। इसके बाद अमित शाह और पुष्कर सिंह धामी ने पिछले चार वर्षों के दौरान राज्य में हुए अभूतपूर्व बदलावों, नई कानूनी व्यवस्थाओं और जनहित की योजनाओं पर विस्तार से अपनी बात रखी। यह समारोह उत्तराखंड की विकास यात्रा में मील का पत्थर साबित हुआ, जहाँ शासन को संतों का आशीर्वाद और आम जनता का अटूट साथ एक साथ प्राप्त हुआ।