Himachal: हिमाचल में पंचायत चुनावों से पहले 84 नई पंचायतों के गठन की अधिसूचना जारी

शिमला। हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर प्रशासनिक सरगर्मी तेज हो गई है। उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार 31 मई से पहले चुनाव संपन्न कराने और 31 मार्च तक सभी चुनावी प्रक्रियाओं को पूरा करने की समय सीमा के बीच राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। पंचायती राज विभाग ने रविवार को प्रदेश में 84 नई पंचायतों के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार ने इन प्रस्तावित पंचायतों को लेकर आम जनता से तीन दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं।

इन नई पंचायतों के गठन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद हिमाचल प्रदेश में पंचायतों की कुल संख्या बढ़कर 3704 हो जाएगी। वर्तमान में, हाल ही में गठित 43 नई पंचायतों को मिलाकर यह संख्या 3620 है। गौरतलब है कि नगर निगमों और परिषदों के गठन के समय कई पंचायतों के शहरी क्षेत्रों में विलय के कारण पूर्व में यह संख्या घटी थी, लेकिन अब मंत्रियों और विधायकों की अनुशंसा एवं भौगोलिक आवश्यकताओं के आधार पर नए सिरे से इनका विस्तार किया जा रहा है।

सरकार के पास इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए अब केवल 30 दिनों का समय शेष है। इतने कम समय में नई पंचायतों का गठन, उनकी सीमाओं का निर्धारण, आपत्तियों का निस्तारण और सबसे महत्वपूर्ण आरक्षण रोस्टर तैयार करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है। सीमाओं में बदलाव के कारण न केवल वार्डों के भूगोल बदलेंगे, बल्कि मतदाता सूचियों को भी नए सिरे से अपडेट करना होगा। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश की 3577 पंचायतों में से 248 ऐसी पंचायतें हैं जिनकी मतदाता सूचियां अब तक अधिसूचित नहीं हो पाई हैं।

जिलों के आधार पर देखें तो सबसे अधिक 20 नई पंचायतें कांगड़ा जिले में बनाई जाएंगी। इसके अलावा सोलन में 12, राजधानी शिमला में 11, सिरमौर में 8, हमीरपुर में 7, ऊना और चंबा में 6-6, मंडी में 5, कुल्लू में 4, किन्नौर और बिलासपुर में 2-2 तथा लाहौल-स्पीति में एक नई पंचायत का गठन प्रस्तावित है। यह गठन का तीसरा चरण है। इससे पहले पांच हजार और तीन हजार से अधिक आबादी वाली पंचायतों को विभाजित कर क्रमशः 4 और 39 पंचायतों को अधिसूचित किया जा चुका है।

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने इस संबंध में स्पष्ट किया कि विभाग पूरी तत्परता से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया को संपन्न करना सरकार की प्राथमिकता है और इसीलिए आपत्तियों व सुझावों के लिए संक्षिप्त समय दिया गया है ताकि जल्द ही अंतिम अधिसूचना जारी कर निर्वाचन आयोग को आगामी कार्यवाही के लिए रिपोर्ट सौंपी जा सके।

 

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