शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए राज्य की नई बैरियर नीति अधिसूचित कर दी है, जिसे 1 अप्रैल से प्रदेश भर में प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। इस नई नीति के लागू होने के बाद बाहरी राज्यों से हिमाचल प्रदेश की सीमा में प्रवेश करने वाले वाहनों को पहले की तुलना में काफी अधिक शुल्क चुकाना होगा। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य राज्य के राजस्व में वृद्धि करना और कर संग्रहण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।
प्रस्तावित नई दरों के अनुसार, सामान्य छोटे वाहनों के प्रवेश शुल्क में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। अब इन वाहनों को 70 रुपये के स्थान पर 170 रुपये का भुगतान करना होगा। इसी तरह, जिन श्रेणी के वाहनों से पहले 110 रुपये वसूले जाते थे, उनके लिए भी अब 170 रुपये की दर निर्धारित कर दी गई है। माल ढोने वाले बड़े ट्रकों के शुल्क में भी इजाफा किया गया है। भारी वाहनों के लिए अधिकतम शुल्क, जो पहले 720 रुपये तय था, उसे बढ़ाकर अब 900 रुपये कर दिया गया है।
इस बार की नीति में सरकार ने एक बड़ा तकनीकी बदलाव करते हुए छह प्रमुख बैरियरों को फास्टैग प्रणाली से जोड़ने का निर्णय लिया है। इनमें सिरमौर जिले का गोविंदघाट, नूरपुर का कंडवाल, ऊना का मैहतपुर, बद्दी, परवाणू और बिलासपुर जिले का गरामोड़ा बैरियर शामिल हैं। बैरियरों का संचालन संभालने वाले ठेकेदारों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे काम मिलने के 15 दिनों के भीतर फास्टैग व्यवस्था को सक्रिय करें। इस डिजिटल पहल से बैरियरों पर नकद लेन-देन की जरूरत कम होगी और वाहनों की आवाजाही में तेजी आएगी, जिससे यात्रियों का समय बचेगा।
बैरियरों के आवंटन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए सरकार ने ऑनलाइन नीलामी का रास्ता चुना है। इसके सफल क्रियान्वयन के लिए संबंधित जिलों के उपायुक्तों की अध्यक्षता में समितियों का गठन किया गया है, जिनमें आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारी भी सदस्य के रूप में शामिल होंगे। यदि किसी बैरियर के संचालन को लेकर कोई विवाद की स्थिति बनती है, तो जिले के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और अन्य विभागीय अधिकारी मिलकर उसका समाधान करेंगे।
राज्य सरकार को इस नई नीति से बड़ी उम्मीदें हैं। अधिकारियों का मानना है कि शुल्क में बढ़ोतरी और फास्टैग के माध्यम से होने वाले संग्रहण से प्रदेश के राजस्व में पहले के मुकाबले दो से तीन गुना तक की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। यह नई व्यवस्था न केवल परिवहन को सुगम बनाएगी, बल्कि राज्य की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती प्रदान करेगी।