Cricket: टी20 विश्व कप में भारत और पाकिस्तान के मुकाबले पर राजीव शुक्ला ने बीसीसीआई का रुख किया साफ – The Hill News

Cricket: टी20 विश्व कप में भारत और पाकिस्तान के मुकाबले पर राजीव शुक्ला ने बीसीसीआई का रुख किया साफ

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबलों का रोमांच हमेशा चरम पर रहता है, लेकिन टी20 विश्व कप 2026 से पहले इस महामुकाबले को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक और कूटनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस पूरे मामले में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने अपनी पहली और महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया दी है। यह प्रतिक्रिया उन खबरों के बीच आई है जिनमें दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) भारत के खिलाफ मैच के बहिष्कार के अपने पुराने फैसले पर यू-टर्न लेने पर विचार कर रहा है। राजीव शुक्ला ने स्पष्ट कर दिया है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार केवल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के पास है और बीसीसीआई आईसीसी के हर फैसले का सम्मान करेगा।

इस विवाद की जड़ें पाकिस्तान सरकार के उस निर्देश में छिपी हैं, जिसमें उसने अपनी टीम को भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में होने वाले टी20 विश्व कप में हिस्सा लेने की अनुमति तो दी थी, लेकिन साथ ही एक कड़ी शर्त भी जोड़ दी थी। पाकिस्तान सरकार ने पीसीबी को निर्देशित किया था कि वह 15 फरवरी को कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में होने वाले ग्रुप मैच में भारतीय टीम के खिलाफ मैदान पर न उतरे। इस फैसले ने क्रिकेट प्रेमियों और टूर्नामेंट के आयोजकों के बीच भारी अनिश्चितता पैदा कर दी थी। हालांकि, अब कुछ ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड पर्दे के पीछे से आईसीसी के साथ बातचीत कर रहा है और भारत के खिलाफ मैच न खेलने के फैसले को वापस ले सकता है।

जब मीडिया कर्मियों ने राजीव शुक्ला से पीसीबी के इस संभावित ‘यू-टर्न’ और बीसीसीआई की स्थिति के बारे में सवाल किया, तो उन्होंने बेहद सधे हुए अंदाज में जवाब दिया। राजीव शुक्ला ने कहा कि वे इस पूरे प्रकरण पर कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करना चाहते और न ही बीसीसीआई की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया जाएगा। उन्होंने मामले की पूरी जिम्मेदारी आईसीसी के कंधों पर डाल दी है। उनका कहना है कि यह मामला अब पूरी तरह से आईसीसी के अधिकार क्षेत्र में है। आईसीसी इस पर जो भी निर्णय लेगा या जो भी फैसला सुनाएगा, भारतीय बोर्ड उसे पूरी तरह से स्वीकार करेगा। बीसीसीआई का यह रुख दर्शाता है कि वह इस विवाद में सीधे तौर पर उलझने के बजाय वैश्विक संस्था के माध्यम से समाधान चाहता है।

इस विवाद को सुलझाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सरगर्मी काफी तेज हो गई है। 8 फरवरी 2026 को आईसीसी के निदेशक इमरान ख्वाजा और मुबाशिर उस्मानी इस मसले पर चर्चा करने के लिए विशेष रूप से लाहौर पहुँचे। लाहौर के ऐतिहासिक गद्दाफी स्टेडियम में उन्होंने पीसीबी के चेयरमैन मोहसिन नकवी के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक की संवेदनशीलता को देखते हुए इसमें बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम को भी शामिल किया गया। माना जा रहा है कि इस त्रिपक्षीय मुलाकात के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मैच के भाग्य पर कोई निर्णायक चर्चा हुई होगी। क्रिकेट विशेषज्ञ इस बैठक को टूर्नामेंट की सफलता के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण मान रहे हैं क्योंकि भारत-पाकिस्तान मैच के बिना किसी भी आईसीसी टूर्नामेंट का आकर्षण और राजस्व काफी कम हो जाता है।

विभिन्न रिपोर्टों और सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने इस मैच को खेलने के बदले आईसीसी के सामने अपनी कुछ मांगें रखी हैं। बताया जा रहा है कि पीसीबी आईसीसी के कुल राजस्व में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का दबाव बना रहा है। इसके अलावा, पाकिस्तान चाहता है कि भारत के साथ उसके द्विपक्षीय क्रिकेट संबंध फिर से बहाल हों, जो पिछले कई वर्षों से राजनीतिक तनाव के कारण बंद पड़े हैं। पीसीबी की मांगों में ‘हैंडशेक पॉलिसी’ को लागू करने का सुझाव भी शामिल है। ये मांगें दर्शाती हैं कि पाकिस्तान इस मैच को एक सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच समाधान तलाशने के लिए ‘बैक-चैनल’ वार्ताएं जारी हैं, ताकि टूर्नामेंट में किसी भी प्रकार का अवरोध पैदा न हो।

भारत-पाकिस्तान मुकाबले का आर्थिक महत्व किसी से छिपा नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मुकाबला रद्द होता है या पाकिस्तान इसका बहिष्कार करता है, तो आईसीसी और प्रसारकों को करोड़ों डॉलर के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ सकता है। यही कारण है कि आईसीसी इस मामले में बेहद सक्रिय है और पाकिस्तान को मनाने की हर संभव कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, भारतीय बोर्ड ने अपना रुख स्पष्ट रखकर गेंद आईसीसी के पाले में डाल दी है। राजीव शुक्ला का बयान इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जहाँ भारत ने खुद को किसी भी प्रकार की सीधी बयानबाजी से दूर रखा है।

अब सबकी नजरें 15 फरवरी की तारीख और कोलंबो के मैदान पर टिकी हैं। क्या पाकिस्तान अपनी सरकार के आदेश को दरकिनार कर मैदान पर उतरेगा या फिर बहिष्कार की अपनी जिद पर अड़ा रहेगा, यह आने वाले कुछ दिनों में साफ हो जाएगा। आईसीसी की लाहौर बैठक के नतीजे इस विवाद का रुख तय करेंगे। यदि मोहसिन नकवी और इमरान ख्वाजा के बीच कोई समझौता हो जाता है, तो यह क्रिकेट प्रशंसकों के लिए एक बड़ी जीत होगी। फिलहाल, राजीव शुक्ला की चुप्पी और आईसीसी पर उनके भरोसे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत केवल नियमों के अनुसार खेल को आगे बढ़ाना चाहता है। इस सियासी और खेल के रोमांच के बीच, टी20 विश्व कप की पूरी रूपरेखा अब आईसीसी के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई है।

 

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