Iran: परमाणु वार्ता से पहले ईरान के मसूद पेजेश्कियन ने ट्रंप को दी खुली चेतावनी – The Hill News

Iran: परमाणु वार्ता से पहले ईरान के मसूद पेजेश्कियन ने ट्रंप को दी खुली चेतावनी

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में राजनीतिक और सैन्य हलचल एक बार फिर अपने चरम पर पहुँच गई है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती तल्खी के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने वाशिंगटन को कड़ा संदेश भेजा है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिका को ईरान का सम्मान करना सीखना चाहिए, क्योंकि ईरान किसी भी परिस्थिति में ताकत की भाषा को बर्दाश्त नहीं करेगा। मसूद पेजेश्कियन का यह बयान ऐसे संवेदनशील समय में आया है जब दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत का दूसरा दौर अगले सप्ताह ओमान में शुरू होने जा रहा है। इस बयान ने कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है और यह संकेत दिया है कि ईरान अपनी शर्तों पर ही मेज पर बैठेगा।

मसूद पेजेश्कियन ने अपने रुख को और स्पष्ट करते हुए जोर देकर कहा कि ईरान को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत अपनी गतिविधियों को चलाने का पूरा हक है। उन्होंने विशेष रूप से ‘नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी’ (एनपीटी) का हवाला देते हुए कहा कि इस संधि के प्रावधानों के अंतर्गत ईरान को यूरेनियम संवर्धन जारी रखने का पूरा अधिकार प्राप्त है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह अपने कानूनी अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा। परमाणु मुद्दे पर ईरान की सोच पूरी तरह से एनपीटी में बताए गए अधिकारों और वैश्विक संधियों पर आधारित है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी बात रखते हुए मसूद पेजेश्कियन ने एक बहुत ही नपा-तुला लेकिन सख्त संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा कि ईरान ने हमेशा सम्मान का जवाब सम्मान से दिया है। उनका कहना था कि ईरानी नेतृत्व बातचीत के लिए हमेशा तैयार रहा है, लेकिन अगर कोई पक्ष धमकाने या सैन्य ताकत दिखाने की कोशिश करेगा, तो उसे ईरान की ओर से कोई रियायत नहीं मिलेगी। हालांकि, उन्होंने ओमान में होने वाली आगामी वार्ता को एक सकारात्मक कदम के रूप में भी देखा और कहा कि उनका प्रशासन कूटनीतिक समाधान के लिए दरवाजे खुले रखे हुए है। यह बयान दर्शाता है कि ईरान एक तरफ बातचीत की इच्छा जता रहा है, तो दूसरी तरफ अपनी संप्रभुता को लेकर भी अत्यंत गंभीर है।

ईरान की इस चेतावनी के पीछे एक बड़ा कारण खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका की बढ़ती सैन्य गतिविधियां भी हैं। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन इस समय ईरान पर दोहरा दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है। एक ओर जहाँ ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर प्रतिबंधों और दबाव की राजनीति चल रही है, वहीं दूसरी ओर जनवरी में ईरान के भीतर हुए विरोध प्रदर्शनों पर की गई कार्रवाई को लेकर भी अमेरिका ईरान को घेरने में जुटा है। इसी दबाव को बढ़ाने के लिए अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति को काफी मजबूत कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि अमेरिका ने क्षेत्र में अपना सैन्य बेड़ा बढ़ा दिया है। हालांकि, अब्बास अराघची ने बड़े ही निडर अंदाज में कहा कि अमेरिकी सेना की इस तैनाती से ईरान बिल्कुल भी डरने वाला नहीं है।

खाड़ी के समुद्री क्षेत्र में अमेरिकी युद्धाभ्यासों और गतिविधियों की रिपोर्ट लगातार सामने आ रही हैं। जनवरी के अंत में अमेरिका ने ‘USS अब्राहम लिंकन’ एयरक्राफ्ट कैरियर को अरब सागर में तैनात किया था, जिसे ईरान के लिए एक बड़े सैन्य संदेश के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा, सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों और खुफिया रिपोर्टों से यह भी खुलासा हुआ है कि जॉर्डन के ‘मुवफ्फाक साल्टी’ एयर बेस पर अमेरिका ने भारी मात्रा में अपने आधुनिक लड़ाकू विमान और ड्रोन तैनात किए हैं। इन तस्वीरों में दर्जनों F-15 फाइटर जेट, MQ-9 रीपर ड्रोन और खतरनाक A-10C थंडरबोल्ट विमानों की मौजूदगी देखी गई है। यह तैनाती दिखाती है कि अमेरिका किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अपनी हवाई शक्ति को तैयार रख रहा है।

नौसैनिक मोर्चे पर भी अमेरिका अपनी घेराबंदी तेज कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, ‘USS डेल्बर्ट डी ब्लैक’ डिस्ट्रॉयर वर्तमान में स्वेज नहर से होते हुए लाल सागर की ओर बढ़ रहा है। इसके साथ ही, खाड़ी क्षेत्र की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए ‘MQ-4C ट्राइटन’ जैसे अत्याधुनिक ड्रोन तैनात किए गए हैं जो लगातार निगरानी कर रहे हैं। इससे पहले भी इस क्षेत्र में E-11A, P-8 पोसाइडन और E-3G सेंट्री जैसे टोही और कमांड विमानों की सक्रियता देखी गई थी। अमेरिका की यह व्यापक सैन्य तैयारी संकेत देती है कि वह ईरान के खिलाफ अपनी ‘मैक्सिमम प्रेशर’ की नीति को सैन्य मोर्चे पर भी लागू कर सकता है।

ईरान और अमेरिका के बीच का यह गतिरोध अब एक ऐसी स्थिति में पहुँच गया है जहाँ एक छोटी सी चूक भी बड़े संघर्ष का रूप ले सकती है। मसूद पेजेश्कियन का ट्रंप को यह याद दिलाना कि ईरान ताकत के आगे नहीं झुकेगा, आगामी ओमान वार्ता के रुख को तय करेगा। अब पूरी दुनिया की नजरें अगले हफ्ते होने वाली बातचीत पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति के माध्यम से इस बढ़ते तनाव को कम किया जा सकता है या फिर सैन्य तैनाती और सख्त बयानों का यह सिलसिला किसी नई अंतरराष्ट्रीय आपदा की ओर ले जाएगा। फिलहाल, मसूद पेजेश्कियन के कड़े शब्दों और डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की सैन्य सक्रियता ने माहौल को काफी गरमा दिया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह सम्मान चाहता है, समर्पण नहीं।

 

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