पटना। बिहार की राजधानी पटना में पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी के बाद से राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्मा गया है। बत्तीस साल पुराने एक कानूनी मामले में पुलिस द्वारा की गई इस त्वरित कार्रवाई ने न केवल राज्य की सियासत में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि सांसद की लगातार बिगड़ती सेहत ने इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। बीती रात से शुरू हुआ यह हाई-वोल्टेज ड्रामा अब कानूनी लड़ाई के साथ-साथ स्वास्थ्य चिंताओं के इर्द-गिर्द सिमट गया है। पुलिस प्रशासन द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद से ही विभिन्न राजनीतिक दलों और समर्थकों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
पप्पू यादव की गिरफ्तारी का नाटकीय घटनाक्रम बीती रात तब शुरू हुआ, जब पुलिस की एक बड़ी टीम पटना स्थित उनके आवास पर पहुँची। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई तीन दशक पुराने एक मामले में की गई है। गिरफ्तारी के समय के हालात को लेकर सांसद ने स्वयं गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके घर पहुँचे कई पुलिसकर्मी वर्दी के बजाय सादे कपड़ों (सिविल ड्रेस) में थे, जो गिरफ्तारी की आधिकारिक प्रक्रिया पर संदेह पैदा करता है। उन्होंने अपनी खराब शारीरिक स्थिति का हवाला देते हुए इस कार्रवाई का विरोध भी किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। आधी रात को हुए इस घटनाक्रम ने इलाके में काफी तनाव पैदा कर दिया था।
गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव की तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद पुलिस उन्हें सबसे पहले आईजीआईएमएस (IGIMS) लेकर पहुँची। हालांकि, अस्पताल में उनके साथ किए गए व्यवहार को लेकर सांसद के आधिकारिक सोशल मीडिया पेज और उनके निजी सचिव ने प्रशासन पर अमानवीय व्यवहार के आरोप लगाए हैं। दावा किया गया है कि आईजीआईएमएस में उन्हें पूरी रात बिस्तर तक नसीब नहीं हुआ और उन्हें स्ट्रेचर पर ही लेटे रहना पड़ा। इलाज में बरती गई इस कथित लापरवाही के कारण समर्थकों में भारी आक्रोश है। शनिवार सुबह स्थिति को देखते हुए उन्हें पीएमसीएच (PMCH) शिफ्ट किया गया, लेकिन वहां भी सुधार न होने पर डॉक्टरों ने उन्हें आईजीआईसी (IGIC) रेफर कर दिया है। वर्तमान में वे वहीं उपचाराधीन हैं।
इस पूरे प्रकरण को सांसद के समर्थकों और उनके सचिव ने एक गहरी राजनीतिक साजिश करार दिया है। समर्थकों का तर्क है कि हाल के दिनों में पप्पू यादव ने नीट (NEET) परीक्षा से जुड़े विवाद में एक छात्रा के पक्ष में मजबूती से आवाज उठाई थी और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला था। उनका मानना है कि इसी मुखरता की वजह से उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है ताकि उनकी आवाज को दबाया जा सके। सचिव द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए दावों में यह भी अंदेशा जताया गया है कि उनके साथ किया जा रहा यह साजिशन व्यवहार उनकी जान के लिए खतरा भी पैदा कर सकता है।
कानूनी मोर्चे पर भी इस गिरफ्तारी को चुनौती दी जा रही है। पप्पू यादव के अधिवक्ता शिवनंदन भारती ने पुलिसिया कार्रवाई को पूरी तरह से गैर-कानूनी और प्रक्रियात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण बताया है। वकील का तर्क है कि जिस 1995 के मामले का हवाला देकर यह गिरफ्तारी की गई है, उसमें सांसद को पहले ही जमानत मिल चुकी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि तकनीकी रूप से बेल टूटी भी थी, तो पुलिस ने संबंधित नोटिसों को जानबूझकर छिपाकर रखा और सीधे कार्रवाई की। अधिवक्ता के अनुसार, कानून की धारा 82 की अनिवार्य प्रक्रिया को पूरी किए बिना ही सीधे धारा 83 के तहत कुर्की और गिरफ्तारी करना संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन है।
अब सभी की नजरें अदालत में होने वाली पेशी पर टिकी हैं। पप्पू यादव की लीगल टीम जमानत के लिए आवश्यक दस्तावेज और अर्जी तैयार कर रही है। यदि न्यायालय उनकी सेहत और वकील द्वारा दी गई दलीलों को आधार मानकर राहत देता है, तो उनकी तत्काल रिहाई संभव हो सकती है। वहीं दूसरी ओर, यदि जमानत याचिका खारिज होती है, तो उन्हें जेल जाना पड़ सकता है। हालांकि, हृदय रोग संस्थान (IGIC) में उनके रेफर होने के बाद यह संभावना भी जताई जा रही है कि उन्हें फिलहाल अस्पताल के ही कैदी वार्ड में रखा जा सकता है।
बिहार के राजनीतिक गलियारों में इस गिरफ्तारी के समय को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। एक तरफ जहाँ कानून अपना काम करने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सांसद के गिरते स्वास्थ्य और उनके द्वारा लगाए गए राजनीतिक प्रतिशोध के आरोपों ने मामले को बेहद पेचीदा बना दिया है। आने वाले कुछ घंटे न केवल पप्पू यादव के व्यक्तिगत भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वे बिहार की आने वाली राजनीति की दिशा भी तय करेंगे। फिलहाल प्रशासन और पुलिस पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है, जबकि समर्थकों की भीड़ अस्पताल के बाहर जुटने लगी है। स्वास्थ्य और कानून के बीच फंसा यह मामला अब बिहार के सबसे बड़े सियासी घटनाक्रमों में से एक बन चुका है।
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