नई दिल्ली। दिल्ली के जनकपुरी इलाके में हुए दर्दनाक बाइक हादसे में दिल्ली पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सब-कॉन्ट्रैक्टर राजेश प्रजापति को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी उस समय हुई जब पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपित को हादसे की पूरी जानकारी थी, लेकिन उसने एक घायल इंसान की जान बचाने के बजाय संवेदनहीनता और सबूतों को छिपाने की कोशिश की। इस हादसे ने एक बार फिर निर्माण कार्यों में बरती जा रही आपराधिक लापरवाही और मानवीय संवेदनाओं के खत्म होने पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
संयुक्त पुलिस आयुक्त जतिन नरवाल ने इस मामले की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि जब कमल ध्यानी अपनी बाइक सहित जल बोर्ड द्वारा खोदे गए गड्ढे में गिरे, तो वहां से गुजर रहे एक परिवार ने इस घटना को अपनी आंखों से देखा था। उस परिवार ने तुरंत पास में बने एक टेंट में रह रहे कर्मचारी को इस हादसे के बारे में बताया। कर्मचारी ने बिना देरी किए अपने मालिक और सब-कॉन्ट्रैक्टर राजेश प्रजापति को फोन करके मौके पर बुलाया। पुलिस जांच में यह कड़वा सच सामने आया है कि राजेश सूचना मिलते ही रात के वक्त मौके पर पहुँच गया था। उसने अपनी आंखों से गड्ढे के भीतर गिरी हुई बाइक और उसमें घायल अवस्था में तड़प रहे कमल को देखा था।
एक जिम्मेदार नागरिक और कार्यस्थल का प्रभारी होने के नाते राजेश का कर्तव्य था कि वह तुरंत पुलिस या एम्बुलेंस को सूचित करता ताकि कमल की जान बच सके। लेकिन इसके विपरीत, राजेश ने संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दीं। उसने मौके से भागना बेहतर समझा और चुपचाप अपने घर चला गया। पुलिस का मानना है कि यदि कमल को समय पर चिकित्सा सहायता मिल जाती, तो उनकी जान बचाई जा सकती थी। राजेश की इस अमानवीय हरकत और लापरवाही के कारण कमल को घंटों तक उस गड्ढे में तड़पते हुए दम तोड़ना पड़ा। दिल्ली पुलिस ने लंबी पूछताछ के बाद राजेश प्रजापति को गिरफ्तार कर लिया है।
हादसे की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अब इस मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है। पुलिस को शक है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी में जल बोर्ड के कुछ अन्य अधिकारी या बड़े ठेकेदार भी शामिल हो सकते हैं। कार्यस्थल पर कोई भी चेतावनी बोर्ड या बैरिकेडिंग न होना इस बात का सबूत है कि यह केवल एक सामान्य हादसा नहीं, बल्कि आपराधिक लापरवाही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इधर, मृतक कमल ध्यानी का परिवार गहरे सदमे और आक्रोश में है। कमल के जुड़वा भाई करण ध्यानी ने प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। करण का आरोप है कि हादसे के इतने घंटे बीत जाने के बाद भी शासन या प्रशासन का कोई भी अधिकारी उनके पास सांत्वना देने या मदद की बात करने नहीं आया। उन्होंने पुलिस पर भी असहयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि वे बार-बार सीसीटीवी फुटेज दिखाने की मांग कर रहे हैं ताकि उन्हें पता चल सके कि वास्तव में उस रात हुआ क्या था, लेकिन पुलिस टालमटोल कर रही है। करण के अनुसार, उन्हें न्याय पाने के लिए खुद ही पुलिस के पीछे भागना पड़ रहा है, जबकि प्रशासन को सक्रिय होना चाहिए था।
मृतक कमल ध्यानी का मूल निवास उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल स्थित खंदवाड़ी गांव में था। दिल्ली में वह अपने माता-पिता और दो भाइयों के साथ कैलाशपुरी इलाके में रहते थे। कमल के पिता नरेश इलाके के एक शिव मंदिर में पुजारी हैं और उनका पूरा परिवार एक साधारण और धार्मिक पृष्ठभूमि से आता है। कमल के बड़े भाई भी पूजा-पाठ के कार्य में पिता का हाथ बंटाते हैं, जबकि जुड़वा भाई करण एक निजी कंपनी में काम करते हैं। एक हंसते-खेलते परिवार का सहारा छीन जाने से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है।
जनकपुरी की यह घटना दिल्ली की सड़कों पर चल रहे निर्माण कार्यों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान है। किसी ठेकेदार या सब-कॉन्ट्रैक्टर की एक छोटी-सी लापरवाही और उसकी संवेदनहीनता ने एक जवान बेटे को उसके परिवार से हमेशा के लिए छीन लिया। उत्तराखंड के इस युवक की मौत ने लोगों के मन में प्रशासन के प्रति गुस्सा भर दिया है। अब देखना यह होगा कि पुलिस इस मामले में राजेश प्रजापति के अलावा अन्य किन अधिकारियों पर शिकंजा कसती है और पीड़ित परिवार को कब तक न्याय मिलता है। फिलहाल, दिल्ली पुलिस ने इस मामले को आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में रखते हुए अपनी जांच तेज कर दी है।