कुल्लू।
हिमाचल प्रदेश के पर्यटन जिले कुल्लू में वीरवार को एक हृदयविदारक घटना होते-होते रह गई, जिससे दर्जनों परिवारों की खुशियां मातम में बदलने से बच गईं। भुंतर-मणिकर्ण मार्ग पर पर्यटकों से खचाखच भरी एक निजी बस अचानक अनियंत्रित होकर गहरी खाई की ओर फिसल गई। यह हादसा छन्नीखोड़ नामक स्थान के समीप पेश आया। बस सड़क से उतरकर खाई के मुहाने पर जाकर टिक गई। यदि बस कुछ फीट और आगे खिसक जाती, तो वह सीधे नीचे उफनती पार्वती नदी के आगोश में समा जाती। इस चमत्कारिक बचाव के बाद बस में सवार यात्रियों ने राहत की सांस ली है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही बस सड़क से बाहर की ओर खिसकना शुरू हुई, वाहन के भीतर बैठे पर्यटकों में चीख-पुकार मच गई। कुछ ही पलों में वहां दहशत का माहौल पैदा हो गया और यात्रियों को अपनी मौत सामने नजर आने लगी। गनीमत यह रही कि बस का टायर सड़क के किनारे एक मलबे या पत्थर में फंस गया, जिससे वह नदी में गिरने से रुक गई। स्थानीय लोगों ने बिना समय गंवाए दिलेरी दिखाई और तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया। ग्रामीणों की मदद से बस के भीतर फंसे हुए डरे-सहमे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम भी मौके पर पहुंची और स्थिति का मुआयना किया। राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि इतने बड़े खतरे के बावजूद किसी भी यात्री को चोट नहीं आई है।
हादसे के कारणों की जांच करने पर पता चला कि इन दिनों पहाड़ी क्षेत्रों में पड़ रही अत्यधिक ठंड और कोहरे की वजह से सड़कों पर भारी पाला (कोहरा जमा हुआ पानी) जम रहा है। भुंतर-मणिकर्ण मार्ग पर कई स्थानों पर पानी जमने के कारण सड़कें बेहद फिसलन भरी हो गई हैं। सुबह और शाम के वक्त जब तापमान शून्य से नीचे चला जाता है, तो सड़कें शीशे की तरह चिकनी हो जाती हैं, जिससे भारी वाहनों का उन पर टिकना और मुड़ना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, इस मार्ग की जर्जर हालत भी वाहन चालकों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। सड़क पर बने गड्ढे और खराब रखरखाव की वजह से चालकों की हल्की सी चूक भी बड़े हादसे को न्योता दे रही है।
स्थानीय निवासियों और वहां मौजूद पर्यटकों ने प्रशासन से सड़क सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि भुंतर-मणिकर्ण मार्ग पर हर साल हजारों पर्यटक आते हैं, लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से यहां संवेदनशील जगहों पर न तो चेतावनी संकेतक लगाए हैं और न ही खाई वाली जगहों पर क्रैश बैरियर की व्यवस्था की है। यदि इस स्थान पर मजबूत क्रैश बैरियर होता, तो बस के सड़क से बाहर निकलने का जोखिम काफी कम हो जाता।
प्रशासन ने इस घटना के बाद वाहन चालकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। अधिकारियों ने अपील की है कि सर्दियों के मौसम में पाले वाले क्षेत्रों में गाड़ी चलाते समय गति को अत्यंत धीमा रखें और मोड़ों पर विशेष सावधानी बरतें। साथ ही, लोक निर्माण विभाग को उन क्षेत्रों में रेत या मिट्टी डालने के निर्देश दिए गए हैं जहां पाला अधिक जम रहा है। फिलहाल, सभी सुरक्षित यात्रियों को दूसरे वाहनों के जरिए उनकी मंजिल की ओर रवाना कर दिया गया है, लेकिन इस घटना ने पहाड़ी सड़कों पर सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।
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