ऋषिकेश। पतित-पावनी गंगा के तट पर स्थित ऋषिकेश के ऐतिहासिक भरत मंदिर में आयोजित ‘वसंतोत्सव 2026’ अध्यात्म, संस्कृति और संगीत के एक अद्भुत संगम का गवाह बना। इस कार्यक्रम की मुख्य आकर्षण ‘मैथिली ठाकुर नाइट’ रही, जिसमें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिरकत की। भक्तिमय वातावरण से सराबोर इस समारोह में साधु-संतों, जनप्रतिनिधियों और देश-प्रदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर लोक संस्कृति और सनातन परंपराओं को जीवित रखने की दिशा में आयोजकों के प्रयासों की जमकर प्रशंसा की।
समारोह को संबोधित करते हुए पुष्कर सिंह धामी ने मधुबनी की प्रख्यात स्वर साधिका और देश की सबसे युवा विधायक मैथिली ठाकुर की प्रतिभा को नमन किया। उन्होंने कहा कि योगनगरी ऋषिकेश की पवित्र भूमि पर मैथिली ठाकुर जैसी युवा प्रतिभा का आगमन एक सौभाग्य की बात है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैथिली ठाकुर आज के युवाओं के लिए साधना, संस्कृति और प्रेरणा का एक सशक्त प्रतीक बन चुकी हैं। उन्होंने अपनी निष्ठा और कठिन परिश्रम से यह साबित किया है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो कला के माध्यम से समाज में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
पुष्कर सिंह धामी ने मैथिली ठाकुर की सराहना करते हुए कहा कि जहाँ आज की युवा पीढ़ी पाश्चात्य संगीत के प्रभाव में अपनी जड़ों को भूल रही है, वहीं मैथिली ठाकुर ने अपनी जड़ों से जुड़े रहकर मैथिली और भोजपुरी लोक संगीत को वैश्विक मंच प्रदान किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मैथिली ठाकुर को दिए गए ‘कल्चरल एंबेसडर ऑफ द ईयर’ पुरस्कार का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यह उनकी कलात्मक तपस्या का यथोचित सम्मान है। मुख्यमंत्री ने संगीत को ईश्वर से संवाद का माध्यम बताते हुए कहा कि मैथिली ठाकुर जैसी विभूतियां यह याद दिलाती हैं कि भारत की वास्तविक आत्मा आज भी गाँवों की चौपालों और लोकधुनों में बसती है।
ऋषिकेश के आध्यात्मिक महत्व पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह भूमि महर्षि रैभ्य की तपस्थली और भगवान विष्णु के साक्षात्कार की साक्षी रही है। त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने भी रावण वध के पश्चात इसी पावन स्थान पर तपस्या की थी और भरत ने यहाँ भगवान नारायण की स्थापना की थी। इसके बाद आदि गुरु शंकराचार्य ने भी इस भूमि पर विशेष पूजन कर इसकी महत्ता को बढ़ाया। पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज पूरे विश्व में सनातन संस्कृति का ध्वज गर्व के साथ फहरा रहा है। अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण, बद्रीनाथ-केदारनाथ धामों का कायाकल्प और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर इसी सांस्कृतिक पुनर्जागरण का हिस्सा हैं।
राज्य सरकार के कार्यों का विवरण देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड में ‘केदारखंड-मानसखंड मंदिर माला मिशन’, ‘शारदा कॉरिडोर’ और ‘यमुना तीर्थ पुनरुद्धार’ जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज’ की स्थापना की गई है, जिससे भारतीय दर्शन और संस्कृति के अध्ययन को मजबूती मिलेगी। इसके अतिरिक्त, गढ़वाल और कुमाऊँ मंडलों में एक-एक ‘स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन’ बनाने की योजना पर भी कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कड़े लहजे में स्पष्ट किया कि देवभूमि की संस्कृति, अस्मिता और मूल स्वरूप से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने सरकार द्वारा लिए गए साहसिक निर्णयों, जैसे सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगारोधी कानून, नकल विरोधी कानून, भू-कानून और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के क्रियान्वयन का जिक्र किया। भ्रष्टाचार के विरुद्ध की गई अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को उन्होंने राज्य की प्रगति का आधार बताया। अंत में, उन्होंने उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने ‘विकल्प रहित संकल्प’ को दोहराते हुए जनता से निरंतर सहयोग की अपील की।
इस अवसर पर पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, राज्य मंत्री विनय रुहेला, सुदर्शन न्यूज के प्रबंध निदेशक सुरेश चव्हाण, ईडी के पूर्व निदेशक राजेश्वर सिंह और देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति चिन्मय पण्ड्या सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में न्यायाधीश परविन्दर सिंह, अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और अन्य विशिष्ट अतिथियों को सम्मानित भी किया गया।
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