देहरादून। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने संगठन के भीतर बढ़ती अनुशासनहीनता और नेताओं की अनियंत्रित बयानबाजी पर कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अब पार्टी की मर्यादा और अनुशासन से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। पिछले कुछ समय से पार्टी के विधायक और वरिष्ठ नेताओं द्वारा सार्वजनिक मंचों पर दी जा रही टिप्पणियों से संगठन लगातार असहज महसूस कर रहा था। इसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए महेंद्र भट्ट ने तत्काल प्रभाव से सभी नेताओं की सार्वजनिक बयानबाजी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इस आदेश की अनदेखी की गई, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
महेंद्र भट्ट ने इस निर्णय की पुष्टि करते हुए बताया कि संगठन की मजबूती के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त लोकतांत्रिक व्यवस्था मौजूद है, लेकिन कुछ नेता इस व्यवस्था का उल्लंघन कर मीडिया और सार्वजनिक स्थलों पर अपनी राय रख रहे हैं, जिससे विरोधियों को राजनीति करने का अवसर मिल रहा है। भट्ट के अनुसार, इस संबंध में पार्टी के सभी पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को औपचारिक रूप से अवगत करा दिया गया है। अब कोई भी नेता यह बहाना नहीं बना सकेगा कि उसे पार्टी की इस नई नीति की जानकारी नहीं थी।
विशेष रूप से पूर्व शिक्षा मंत्री और वर्तमान भाजपा विधायक अरविंद पांडे के हालिया बयानों ने संगठन के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी थीं। उनके बयानों से उपजे विवाद को शांत करने के लिए प्रदेश अध्यक्ष ने उनसे व्यक्तिगत रूप से बातचीत भी की है। महेंद्र भट्ट ने अरविंद पांडे को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चूंकि वे सरकार का एक महत्वपूर्ण अंग हैं, इसलिए उनकी जो भी शिकायतें या सुझाव हैं, उन्हें केवल पार्टी फोरम या सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष ही रखा जाना चाहिए। सार्वजनिक रूप से सरकार की कार्यप्रणाली या संगठन की नीतियों पर सवाल उठाना किसी भी जनप्रतिनिधि के लिए उचित आचरण नहीं माना जाएगा।
बयानबाजी पर रोक के साथ-साथ महेंद्र भट्ट ने आगामी सांगठनिक गतिविधियों की जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि पार्टी की कोर कमेटी की अगली बैठक जल्द ही आयोजित की जाएगी। इससे पहले कोर कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक पिछले लोकसभा सत्र के दौरान दिल्ली में संपन्न हुई थी। अब संसद के आगामी बजट सत्र के दौरान संगठन की भविष्य की रणनीतियों और ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा के लिए कोर कमेटी का पुनः मंथन होगा। इस बैठक में प्रदेश के राजनीतिक हालातों और सरकार के प्रदर्शन की भी समीक्षा किए जाने की संभावना है।
हाल के दिनों में उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में लगे भाजपा के नए होर्डिंग्स और पोस्टरों को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया था। इन होर्डिंग्स से प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम का नाम और फोटो गायब होने पर विपक्षी दलों और राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। इस मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए महेंद्र भट्ट ने कहा कि इन होर्डिंग्स का डिजाइन सीधे दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय से तैयार होकर आया है। उन्होंने इन चर्चाओं को पूरी तरह कोरी अफवाह करार दिया कि इसके पीछे कोई आपसी कलह या गुटबाजी है। भट्ट ने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे इस तरह की भ्रामक बातों पर ध्यान न दें और पूरी निष्ठा के साथ संगठन के कार्यों में जुटें।
भारतीय जनता पार्टी द्वारा उठाया गया यह सख्त कदम यह संकेत देता है कि प्रदेश नेतृत्व अब आगामी चुनौतियों को देखते हुए संगठन को पूरी तरह एकजुट रखना चाहता है। महेंद्र भट्ट के इस आक्रामक तेवर ने उन नेताओं के लिए खतरे की घंटी बजा दी है जो अपनी व्यक्तिगत राजनीति चमकाने के लिए पार्टी लाइन से हटकर चलते रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस प्रतिबंध के बाद पार्टी के भीतर चल रही खींचतान थमती है या नए रूप में सामने आती है। फिलहाल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की इस सख्ती ने पूरी पार्टी में अनुशासन का संदेश पहुँचा दिया है।