Uttarakhand: उत्तराखंड में सुशासन की नई मिसाल और जन समस्याओं के समाधान के लिए घर-घर पहुंची धामी सरकार – The Hill News

Uttarakhand: उत्तराखंड में सुशासन की नई मिसाल और जन समस्याओं के समाधान के लिए घर-घर पहुंची धामी सरकार

देहरादून। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान ने राज्य में सुशासन की एक नई और प्रभावी परिभाषा लिखी है। सरकार और जनता के बीच की भौगोलिक और प्रशासनिक दूरियों को पाटने के लिए शुरू किया गया यह अभियान अब एक व्यापक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। इस पहल के माध्यम से शासन स्वयं चलकर नागरिकों की चौखट तक पहुंच रहा है, जिससे न केवल सरकारी प्रक्रियाओं में तेजी आई है, बल्कि आम जनता का प्रशासन के प्रति विश्वास भी सुदृढ़ हुआ है।

हालिया आंकड़ों के अनुसार, इस अभियान की सक्रियता और प्रभावशीलता निरंतर बढ़ती जा रही है। प्रदेशभर में आज एक ही दिन में कुल 17 विशेष शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों में भारी जनसहभागिता देखने को मिली, जहां कुल 9,674 नागरिकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उन लोगों की समस्याओं को सुनना था, जिन्हें अक्सर अपने छोटे-छोटे कार्यों के लिए जिला या ब्लॉक मुख्यालयों की दौड़ लगानी पड़ती थी। मौके पर ही अधिकारियों की मौजूदगी ने लोगों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण का मार्ग प्रशस्त किया।

अभियान की अब तक की कुल प्रगति पर नजर डालें तो यह आंकड़े शासन की जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। अब तक की निर्धारित अवधि में पूरे राज्य के विभिन्न कोनों में कुल 445 कैंपों का सफल आयोजन किया जा चुका है। इन शिविरों के माध्यम से शासन अब तक 3,54,059 नागरिकों के साथ सीधा संपर्क स्थापित कर चुका है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों तक सरकार की पहुंच यह प्रमाणित करती है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की दूरदर्शी सोच ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, संवेदनशील और जवाबदेह बना दिया है।

इन कैंपों की सफलता का सबसे बड़ा कारण इनका ‘वन-स्टॉप सॉल्यूशन’ मॉडल है। यहां न केवल नागरिकों की व्यक्तिगत और सामाजिक समस्याओं को दर्ज किया जा रहा है, बल्कि विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी मौके पर दी जा रही है। पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक कागजी कार्यवाही को भी इन्हीं शिविरों में अंतिम रूप दिया जा रहा है। इससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हुई है और बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो गई है। जनता को अब यह विश्वास हो चला है कि उनकी सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए पूरी ईमानदारी से काम कर रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अभियान के महत्व को स्पष्ट करते हुए कहा है कि उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि प्रशासनिक अधिकारी केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित न रहें, बल्कि धरातल पर जाकर लोगों की पीड़ा को समझें और उसका समाधान निकालें। यह कैंप उत्तराखंड की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच सुशासन को प्रभावी बनाने का एक सशक्त आधार बनते जा रहे हैं।

इस अभियान ने न केवल शिकायतों का निस्तारण किया है, बल्कि सरकारी तंत्र के भीतर भी एक नई कार्य-संस्कृति को जन्म दिया है। अब अधिकारी और कर्मचारी सीधे जनता के प्रति जवाबदेह महसूस कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इन शिविरों का दायरा और अधिक बढ़ाने की योजना है, ताकि प्रदेश का कोई भी नागरिक सुविधाओं से वंचित न रहे। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम अब उत्तराखंड के विकास पथ पर एक मील का पत्थर साबित हो रहा है, जो राज्य को सशक्त, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने के संकल्प को साकार कर रहा है।

 

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