देहरादून 22 जनवरी 2026। उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने राज्य में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं की धीमी गति पर कड़ा रुख अपनाया है। गुरुवार को सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान उन्होंने पूंजीगत व्यय, केंद्रीय सहायता प्राप्त योजनाओं (CSS) और वाह्य सहायतित परियोजनाओं (EAP) की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि प्रोजेक्ट्स की प्रगति में सुधार नहीं हुआ, तो इसके लिए सीधे तौर पर संबंधित विभाग के विभागाध्यक्ष और सचिव जिम्मेदार माने जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे केवल फाइलों तक सीमित न रहें, बल्कि धरातल पर परिणाम सुनिश्चित करें।
बैठक में मुख्य सचिव ने उद्यान और कृषि विभाग को एक साथ मिलकर बड़े और एकीकृत (इंटीग्रेटेड) प्रोजेक्ट्स तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सेब, कीवी और ऐरोमा जैसे क्षेत्रों में अलग-अलग काम करने के बजाय एकीकृत खेती की दिशा में कदम बढ़ाए जाने चाहिए। इसी तरह, मत्स्य पालन विभाग को निर्देशित किया गया कि ट्राउट उत्पादन को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए कोल्ड स्टोरेज की उपलब्धता अनिवार्य है। उन्होंने पशुपालन और सहकारिता विभाग को निर्देश दिए कि वे पशुधन और मत्स्य पालन को जोड़कर साझा प्रोजेक्ट तैयार करें, जिससे किसानों की आय में इजाफा हो सके।
किसानों के हितों की रक्षा के लिए मुख्य सचिव ने प्रदेश भर में एक व्यापक कोल्ड स्टोरेज चेन विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ‘एप्पल मिशन’ की सफलता के लिए नर्सरी और कोल्ड स्टोरेज का मजबूत नेटवर्क होना आवश्यक है। इस व्यवस्था का लाभ यह होगा कि उत्तराखंड का कोई भी किसान अपने उत्पाद को खराब होने से बचा सकेगा और बाजार की मांग के अनुसार सही समय पर अपनी फसल बेचकर बेहतर मुनाफा कमा पाएगा।
सड़क और बुनियादी ढांचे से जुड़ी योजनाओं पर चर्चा करते हुए आनन्द बर्द्धन ने ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ (PMGSY) के तहत लंबित भूमि मुआवजे का मुद्दा उठाया। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट लक्ष्य दिया कि इस वित्तीय वर्ष के अंत तक भूमि मुआवजे का वितरण कार्य अभियान चलाकर पूरा किया जाए, ताकि किसी भी किसान का बकाया शेष न रहे। कृषि विभाग को जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा हेतु ‘चेन लिंक फेंसिंग’ के प्रस्तावों को प्राथमिकता के आधार पर शासन को भेजने के लिए कहा गया है।
पर्यावरण और जल संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए मुख्य सचिव ने ‘सारा’ (स्प्रिंग एवं रिवर रेजूविनेशन प्राधिकरण) के अंतर्गत चल रहे कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने जल संरक्षण के लिए नदियों और जल स्रोतों पर छोटे-छोटे बैराज और चेक डैम बनाने के बड़े प्रोजेक्ट्स तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने परिवहन विभाग को भी आदेश दिया कि नए बस स्टेशनों और इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशनों के निर्माण में तेजी लाई जाए ताकि प्रदेश का सार्वजनिक परिवहन ढांचा आधुनिक बन सके।
बैठक के अंत में मुख्य सचिव ने सभी विभागों के लिए एक कड़ा डेडलाइन निर्धारित की। उन्होंने आदेश दिया कि मार्च 2026 तक के सभी लक्ष्य तत्काल वित्त विभाग को सौंपे जाएं। सभी विभागों को अपने नए प्रस्ताव हर हाल में 30 जनवरी तक शासन को उपलब्ध कराने होंगे। उन्होंने दो टूक कहा कि निर्धारित तिथि के बाद किसी भी प्रस्ताव पर विचार नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं, जो विभाग अपने फंड का सही समय पर उपयोग नहीं कर पाएंगे, उनका बजट काटकर उन विभागों को दे दिया जाएगा जो अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बैठक में प्रमुख सचिव एल. फ़ैनाई, सचिव दिलीप जावलकर, वी. षणमुगम, बृजेश कुमार संत और अहमद इक़बाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्य सचिव की इस सख्ती से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप की स्थिति है।
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