गैरसैंण। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इन दिनों राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में हैं। यहाँ विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने वाला है, लेकिन सदन की औपचारिक कार्यवाही में जुटने से पहले मुख्यमंत्री एक अलग ही और बेहद सादगी भरे अंदाज में नजर आए। मंगलवार की सुबह वे अपनी सुरक्षा और प्रोटोकॉल के बीच सामान्य रूप से मॉर्निंग वॉक पर निकले। इस दौरान उन्होंने केवल सैर ही नहीं की, बल्कि विधानसभा परिसर और आसपास ड्यूटी पर तैनात उन तमाम कर्मचारियों से भी मुलाकात की, जो पर्दे के पीछे रहकर सत्र के सफल संचालन के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
भ्रमण के दौरान पुष्कर सिंह धामी ने रास्ते में मिले सफाई कर्मियों और सुरक्षा व्यवस्था में तैनात पुलिस के जवानों को रोककर उनसे आत्मीयता के साथ बातचीत की। मुख्यमंत्री ने स्वयं आगे बढ़कर सभी का हाल-चाल और कुशलक्षेम जाना। उन्होंने उन पुलिसकर्मियों और अन्य कर्मचारियों के कार्यों की सराहना की, जो अत्यधिक ठंड और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों के साथ संवाद के दौरान यह जानने का प्रयास किया कि उन्हें कार्य के दौरान किसी प्रकार की समस्या या असुविधा का सामना तो नहीं करना पड़ रहा है। शासन के मुखिया को अपने बीच इतनी सहजता से पाकर कर्मचारी भी काफी उत्साहित और खुश नजर आए।
सैर करते हुए मुख्यमंत्री विधानसभा परिसर स्थित मुख्य रसोई गृह (किचन) में भी जा पहुँचे। यहाँ उन्होंने सत्र के दौरान जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए तैयार किए जा रहे भोजन की व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। धामी ने रसोई में काम कर रहे कर्मचारियों से उनकी कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भोजन की गुणवत्ता, शुद्धता और स्वच्छता का पूरा ध्यान रखा जाए। इसके साथ ही उन्होंने वहां तैनात कर्मियों से उनकी व्यक्तिगत आवश्यकताओं और काम के दौरान आने वाली चुनौतियों के बारे में भी फीडबैक लिया, ताकि प्रशासन स्तर पर उन्हें त्वरित रूप से हल किया जा सके।
अपनी फिटनेस के प्रति सदैव सजग रहने वाले मुख्यमंत्री ने इसके बाद परिसर में स्थित जिम का भी रुख किया। उन्होंने वहां मौजूद आधुनिक फिटनेस उपकरणों और अन्य सुविधाओं का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने जिम में कुछ समय तक स्वयं भी व्यायाम किया और वहां की व्यवस्थाओं को परखा। मुख्यमंत्री का यह व्यवहार यह संदेश देता है कि वे शासन के सर्वोच्च पद पर होने के बावजूद जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं और सरकारी अमले के साथ सीधा जुड़ाव रखने में विश्वास करते हैं। सत्र की भारी व्यस्तता और राजनीतिक चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री का यह संवेदनशील और सहज व्यवहार गैरसैंण में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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