शिमला। हिमाचल प्रदेश में आपदा प्रबंधन और पुनर्वास कार्यों को नई गति देने के लिए राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में कैबिनेट उप-समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धरमानी भी उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य में चल रहे पुनर्वास प्रयासों की व्यापक समीक्षा करना और भविष्य में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए एक मजबूत सुरक्षा ढांचा तैयार करना था। सरकार का पूरा ध्यान अब जमीनी स्तर पर आपदा तैयारी और प्रतिक्रिया तंत्र को सशक्त बनाने पर केंद्रित है।
बैठक के दौरान जगत सिंह नेगी ने विभिन्न विभागों द्वारा आपदा तैयारियों की दिशा में उठाए गए सक्रिय कदमों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए हर स्तर पर सतर्कता और पूर्व तैयारी अनिवार्य है। अधिकारियों ने समिति को अवगत कराया कि पूरे राज्य की पंचायतों में ‘इमरजेंसी रिस्पांस सेंटर’ (आपातकालीन प्रतिक्रिया केंद्र) स्थापित किए जा रहे हैं। बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए 250 भवनों की पहचान की गई है, जिन्हें भूकंप और अन्य आपदाओं के प्रति सुरक्षित बनाने के लिए ‘रिट्रोफिटिंग’ की जाएगी। इसमें से चंबा जिले के 60 स्कूलों में यह कार्य पहले ही शुरू हो चुका है, जो बच्चों की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है।
राजस्व मंत्री ने राज्य के प्रमुख संस्थानों की विस्तृत मैपिंग करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने इन संस्थानों को प्रदेश की ‘जीवन रेखा’ बताते हुए निर्देश दिए कि आईजीएमसी शिमला, डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज टांडा, दस क्षेत्रीय अस्पतालों और तीन जोनल अस्पतालों को आपदा की स्थिति में पूरी तरह सुरक्षित और क्रियाशील रखा जाए। इन संस्थानों का लचीलापन सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है ताकि किसी भी संकट के समय स्वास्थ्य सेवाएं बाधित न हों।
बैठक में बीमा क्षेत्र से जुड़े एक महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी दी गई। पशुपालन विभाग के सचिव रितेश चौहान की अध्यक्षता में 18 दिसंबर 2025 को एक राज्य स्तरीय बीमा समिति अधिसूचित की गई थी। इस समिति को व्यक्तिगत और सार्वजनिक दोनों प्रकार की संपत्तियों के लिए बीमा विकल्पों की तलाश करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। समिति की पहली बैठक 12 जनवरी को संपन्न हो चुकी है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य आपदाओं के दौरान एक मजबूत वित्तीय बैकअप प्रदान करना है, जिससे न केवल राज्य सरकार पर पड़ने वाले राजकोषीय बोझ में कमी आएगी, बल्कि प्रभावित लोगों को बेहतर बीमा कवरेज और अधिक मुआवजा मिलना सुनिश्चित होगा।
तकनीकी सुधारों पर चर्चा करते हुए अधिकारियों ने बताया कि राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण विभिन्न हितधारकों के समन्वय से ‘मल्टी-हजार्ड अर्ली वार्निंग सिस्टम’ (बहु-खतरा पूर्व चेतावनी प्रणाली) स्थापित करने की प्रक्रिया में है। इसके अलावा, आपदा हेल्पलाइनों 1070 और 1077 के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया। ये नंबर अब राष्ट्रीय आपातकालीन नंबर 112 के साथ एकीकृत कर दिए गए हैं, जिससे आपदा के समय त्वरित सहायता प्राप्त करना आसान होगा।
समिति ने आपदा के समय निजी हेलीकॉप्टर किराए पर लेने के संवेदनशील मुद्दे पर भी गंभीरता से विचार-विमर्श किया। इस पर सहमति बनी कि मामले को अंतिम निर्णय के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के संज्ञान में लाया जाएगा और आगामी कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा। साथ ही, आपदा प्रतिक्रिया क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एसडीआरएफ (SDRF) में रिक्त पड़े पदों को पुलिस बल के कर्मियों से भरने पर भी सहमति बनी।
इस उच्च स्तरीय बैठक में आपदा प्रबंधन के विशेष सचिव डी.सी. राणा, सामान्य प्रशासन के विशेष सचिव हरबंस ब्रासकोन, एसडीआरएफ के पुलिस अधीक्षक अरिजीत सेन ठाकुर और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के निदेशक हेमिस नेगी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। समिति के इन निर्णयों से हिमाचल प्रदेश में आपदा प्रबंधन की एक नई और अधिक वैज्ञानिक रूपरेखा तैयार होने की उम्मीद है।
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