देहरादून। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के निवासी सुखवंत सिंह द्वारा हल्द्वानी के काठगोदाम में की गई आत्महत्या के मामले में पुलिस मुख्यालय ने बेहद सख्त और बड़ा कदम उठाया है। इस प्रकरण की गंभीरता और इसमें स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने एक उच्चस्तरीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। यह एसआईटी पूरे मामले की गहराई से विवेचना करेगी ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और घटना के पीछे छिपे तथ्यों को उजागर किया जा सके।
पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेशों के अनुसार, इस संवेदनशील मामले की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय एसआईटी की कमान पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) एसटीएफ नीलेश आनन्द भरणे को सौंपी गई है। इस टीम में अनुभवी पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया है ताकि जांच की गुणवत्ता और निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठ सके। एसआईटी के अन्य सदस्यों में चम्पावत के पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, टनकपुर की क्षेत्राधिकारी वंदना वर्मा, चम्पावत के निरीक्षक दिवान सिंह बिष्ट और उपनिक्षक मनीष खत्री को शामिल किया गया है। नीलेश आनन्द भरणे की अध्यक्षता में यह टीम घटना से जुड़े हर पहलू की बारीकी से पड़ताल करेगी।
जांच प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए पुलिस मुख्यालय ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस प्रकरण के बाद निलंबित किए गए कुल 12 पुलिस कर्मियों को तत्काल प्रभाव से ऊधमसिंह नगर से हटाकर गढ़वाल रेंज में स्थानांतरित कर दिया गया है। इन पुलिस कर्मियों को दुर्गम जनपदों चमोली और रुद्रप्रयाग में नई तैनाती दी गई है। स्थानांतरित होने वालों में तीन उपनिरीक्षक, एक अपर उपनिरीक्षक, एक मुख्य आरक्षी और सात आरक्षी शामिल हैं। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विवेचना के दौरान स्थानीय स्तर पर कोई भी प्रभावशाली व्यक्ति या पुलिसकर्मी जांच प्रक्रिया को प्रभावित न कर सके।
गौरतलब है कि ग्राम पैगा, थाना आईटीआर्ई, ऊधमसिंह नगर निवासी सुखवंत सिंह ने 10 और 11 जनवरी 2026 की मध्यरात्रि को हल्द्वानी के काठगोदाम क्षेत्र में आत्मघाती कदम उठाया था। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो और मृतक द्वारा भेजा गया एक ई-मेल सार्वजनिक हुआ था। इस वीडियो और ई-मेल में सुखवंत सिंह ने अपनी व्यथा साझा की थी और स्थानीय व्यक्तियों के साथ-साथ ऊधमसिंह नगर पुलिस के कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। मृतक ने इन लोगों पर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और उसकी शिकायतों पर कार्रवाई न करने का दोष मढ़ा था।
पुलिस मुख्यालय ने एसआईटी को विशेष निर्देश दिए हैं कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और मृतक के ई-मेल में अंकित हर एक तथ्य का विस्तृत परीक्षण किया जाए। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि ई-मेल में लगाए गए आरोपों की सत्यता जांची जाए और यदि स्थानीय नागरिक या पुलिस विभाग का कोई भी कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर वैधानिक कार्यवाही अमल में लाई जाए।
इस उच्चस्तरीय जांच के आदेश से यह साफ हो गया है कि प्रशासन इस मामले में किसी भी प्रकार की कोताही बरतने के मूड में नहीं है। पुलिस महानिरीक्षक के नेतृत्व में टीम अब यह पता लगाएगी कि आखिर वे कौन सी परिस्थितियां थीं जिन्होंने सुखवंत सिंह को इतना बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर किया। राज्य पुलिस इस मामले के जरिए यह संदेश देना चाहती है कि कानून के सामने सभी समान हैं और वर्दी की आड़ में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल, एसआईटी ने अपनी कार्ययोजना तैयार कर ली है और जल्द ही इस मामले में बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।