जम्मू। जम्मू-कश्मीर की सीमाएं इन दिनों घने कोहरे की चादर में लिपटी हैं और पहाड़ बर्फ से लदे हुए हैं। इस चुनौतीपूर्ण मौसम का फायदा उठाकर आतंकियों के कई समूह भारतीय सीमा में घुसपैठ करने के लिए लगातार मौके की तलाश में हैं। हालांकि, भारतीय सुरक्षाबलों की सतर्कता और ‘ऑपरेशन सर्द हवा’ के कारण आतंकियों के तमाम मंसूबे नाकाम हो रहे हैं। घुसपैठरोधी ग्रिड को पहले से कहीं अधिक मजबूत कर दिया गया है, जिससे सीमा पार से होने वाली किसी भी हलचल पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर वर्तमान में हाई अलर्ट घोषित है। सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए सेना की अतिरिक्त टुकड़ियों की तैनाती की गई है। इसके साथ ही, अलग-अलग स्थानों पर औचक नाकेबंदी की जा रही है और तकनीकी सर्वेलांस के जरिए हर संदिग्ध गतिविधि की निगरानी हो रही है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय सीमा और अंदरूनी इलाकों को सुरक्षित रखने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने विशेष रूप से ‘ऑपरेशन सर्द हवा’ छेड़ रखा है। इस अभियान के दौरान न केवल चौकसी बढ़ाई गई है, बल्कि वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी लगातार अग्रिम चौकियों का दौरा कर जवानों का मनोबल बढ़ा रहे हैं।
खुफिया सूचनाओं के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय सीमा से लेकर नियंत्रण रेखा के पार बने 69 लॉन्चिंग पैडों पर लगभग 150 से अधिक आतंकी मौजूद हैं, जो घुसपैठ के लिए सही समय का इंतजार कर रहे हैं। इन खतरों को देखते हुए सेना, सुरक्षाबल और खुफिया एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ काम कर रही हैं। आगामी गणतंत्र दिवस को ध्यान में रखते हुए पूरे केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया गया है। इसी कड़ी में सेना की उत्तरी कमान के आर्मी कमांडर प्रतीक शर्मा ने उत्तरी कश्मीर में नियंत्रण रेखा का दौरा कर जमीनी स्तर पर सुरक्षा हालातों की समीक्षा की।
आमी कमांडर प्रतीक शर्मा ने स्थानीय यूनिटों के साथ बैठक कर निर्देश दिए हैं कि खुफिया तंत्र को और अधिक मजबूत बनाया जाए ताकि उभरती सुरक्षा चुनौतियों का समय रहते सामना किया जा सके। जम्मू के कठुआ जिले में आतंकियों की मौजूदगी और हलचल की विशेष जानकारी मिलने के बाद रणनीति में बदलाव किया गया है। सेना ने न केवल नियंत्रण रेखा, बल्कि उन पारंपरिक मार्गों पर भी पहरा सख्त कर दिया है जिनका उपयोग आतंकी घुसपैठ कर कश्मीर घाटी में प्रवेश करने के लिए करते रहे हैं। सूत्रों की मानें तो आर्मी कमांडर जल्द ही राजौरी सेक्टर का भी दौरा करेंगे।
अपनी यात्रा के दौरान प्रतीक शर्मा ने गुलमर्ग स्थित ‘हाई एल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल’ का भी निरीक्षण किया और वहां चल रही सैनिकों की प्रशिक्षण गतिविधियों का जायजा लिया। उन्होंने कश्मीर में आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन का दौरा कर किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने की तैयारियों को भी जांचा।
सेना के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में सुरक्षाबल और सेना मिलकर आतंकियों पर दबाव बनाने की दोहरी रणनीति पर काम कर रहे हैं। एक तरफ सीमा पर घुसपैठ को पूरी तरह रोकने के प्रयास हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ अंदरूनी इलाकों में छिपे आतंकियों और उनके मददगारों को खोजने के लिए व्यापक तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं। देशविरोधी तत्वों और आतंकियों के बारे में मिलने वाली हर छोटी-बड़ी सूचना पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है ताकि शांति व्यवस्था को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे। यह विशेष सतर्कता गणतंत्र दिवस समारोहों के शांतिपूर्ण आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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