नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के लिए सोमवार का दिन बड़ी निराशा लेकर आया। पीएसएलवी-सी62/ईओएस-एन1 मिशन के तहत प्रक्षेपित किया गया रॉकेट अपने लक्ष्य तक पहुंचने में विफल रहा, जिससे करोड़ों रुपये की लागत वाले महत्वपूर्ण उपग्रह अंतरिक्ष में ही कहीं भटक गए हैं। इस मिशन की सबसे खास बात रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित किया गया ‘अन्वेषा’ उपग्रह था, जो एक अत्यंत गोपनीय हाइपरस्पेक्ट्रल निगरानी उपग्रह था। इस मिशन के असफल होने से भारत की अंतरिक्ष और रक्षा रणनीतियों को बड़ा झटका लगा है।
यह प्रक्षेपण सोमवार सुबह 10 बजकर 18 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया था। शुरुआती उड़ान के दौरान सब कुछ सामान्य लग रहा था। चार चरणों वाले इस पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) के पहले और दूसरे चरण ने योजना के मुताबिक ही प्रदर्शन किया। लेकिन जैसे ही रॉकेट अपनी यात्रा के तीसरे चरण (PS3) में पहुंचा, वहां एक ‘असामान्य विचलन’ यानी तकनीकी गड़बड़ी देखी गई। इस विचलन के कारण रॉकेट अपने निर्धारित मार्ग से पूरी तरह भटक गया।
इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने इस तकनीकी खराबी की पुष्टि करते हुए बताया कि रॉकेट अपने तय रास्ते पर आगे नहीं बढ़ सका है। उन्होंने कहा कि फिलहाल विशेषज्ञ डेटा का बारीकी से विश्लेषण कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि गड़बड़ी वास्तव में किस स्तर पर हुई। हालांकि इसरो अध्यक्ष ने अभी आधिकारिक रूप से इस मिशन को सफल या असफल घोषित करने से परहेज किया है, लेकिन रॉकेट के मार्ग से भटकने के कारण इसमें सवार सभी 16 उपग्रहों का भविष्य अब अंधकारमय हो गया है। इन उपग्रहों में मुख्य रूप से ईओएस-एन1 और डीआरडीओ का अन्वेषा शामिल थे।
यह इसरो के लिए चिंता का विषय इसलिए भी है क्योंकि पीएसएलवी रॉकेट परियोजनाओं में यह लगातार दूसरी असफलता है। पीएसएलवी को इसरो का सबसे भरोसेमंद और ‘वर्कहॉर्स’ रॉकेट माना जाता रहा है, लेकिन लगातार दो विफलताएं इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रही हैं। इसरो के अब तक के इतिहास में 64 प्रक्षेपणों में से कुल पांच बार असफलता मिली है, जो वैश्विक मानकों के अनुसार कोई बहुत खराब रिकॉर्ड नहीं है, परंतु हालिया प्रदर्शन ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है।
गौरतलब है कि साल 2025 के एक पिछले मिशन की विफलता के बाद भी इसरो ने एक विश्लेषण समिति का गठन किया था, लेकिन उस समिति की रिपोर्ट के निष्कर्षों को कभी सार्वजनिक नहीं किया गया। इसी बीच इसरो ने साल 2026 के अपने पहले महत्वपूर्ण प्रक्षेपण के रूप में पीएसएलवी-सी62 को लॉन्च करने का फैसला किया, जो दुर्भाग्यवश सफल नहीं हो सका। मानक प्रक्रियाओं के तहत अब एक बार फिर विफलता के कारणों की जांच की जाएगी।
पीएसएलवी-सी62 अपने साथ कुल 16 उपग्रह लेकर गया था। इनमें ईओएस-एन1 जैसे महत्वपूर्ण पृथ्वी अवलोकन उपग्रह के साथ-साथ डीआरडीओ की निगरानी तकनीक के लिए महत्वपूर्ण अन्वेषा भी शामिल था। ये सभी उपग्रह अब अंतरिक्ष के अनंत विस्तार में कहीं खो गए हैं और अपने निर्धारित कार्य को पूरा करने में सक्षम नहीं होंगे। इस विफलता से न केवल आर्थिक नुकसान हुआ है, बल्कि रक्षा क्षेत्र में निगरानी की नई तकनीक के परीक्षण में भी देरी होगी। इसरो अब आने वाले दिनों में डेटा विश्लेषण के बाद इस मिशन के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा कर सकता है।
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