नई दिल्ली। ईरान की सड़कें एक बार फिर सुलग उठी हैं और वहां सरकार के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप लेते जा रहे हैं। सुरक्षा बलों के साथ हुई ताजा झड़पों में सात लोगों की मौत हो गई है। ये प्रदर्शन देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाले इस्लामी शासन के खिलाफ हो रहे हैं। लोग बिगड़ती अर्थव्यवस्था और आसमान छूती महंगाई से तंग आकर सड़कों पर उतर आए हैं और सर्वोच्च नेता के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में प्रदर्शनकारी खुलकर एक धर्म विशेष और धार्मिक नेतृत्व के खिलाफ नारे लगाते दिख रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि जब तक मुल्ला का पर्दाफाश नहीं हो जाता तब तक यह मातृभूमि स्वतंत्र नहीं होगी। नारों में यह भी गूंज रहा है कि मुल्लाओं को ईरान छोड़ना होगा। ईरान सरकार इन प्रदर्शनों को कुचलने के लिए लगातार सख्त एक्शन ले रही है। हालांकि राजधानी तेहरान में प्रदर्शनों की तीव्रता कुछ कम हुई है लेकिन देश के कई अन्य हिस्सों में लोग सरकार के खिलाफ भारी विरोध जता रहे हैं।
समाचार एजेंसी तसनीम के मुताबिक सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने एक संयुक्त अभियान चलाते हुए पश्चिमी तेहरान के मलार्ड जिले में सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप में 30 लोगों की पहचान की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। ईरान में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत 27 दिसंबर 2025 से हुई थी। सबसे पहले राजधानी तेहरान में दुकानदारों ने बढ़ती कीमतों और आर्थिक मंदी के खिलाफ हड़ताल शुरू की थी जो अब पूरे देश में फैल गई है।
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार इन प्रदर्शनों के दौरान बुधवार 31 दिसंबर को दो और गुरुवार 1 जनवरी को पांच लोगों की जान चली गई। ये मौतें उन चार शहरों में हुई हैं जहां मुख्य रूप से लूर जातीय समूह के लोग रहते हैं। हिंसा का केंद्र बने लोरेस्टान प्रांत के अजना शहर से भी खौफनाक वीडियो सामने आए हैं। तेहरान से लगभग 300 किलोमीटर दूर इस शहर में लोग बेशर्म बेशर्म के नारे लगाते दिखे और सड़कों पर जलती हुई वस्तुएं व गोलियों की आवाजें सुनाई दीं। हालात बेकाबू होते देख सरकार लगातार गिरफ्तारियां कर रही है लेकिन महंगाई की आग ने लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया है।
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